भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ‘डीओपीटी’ ने अब आईएएस अधिकारियों के खिलाफ होने वाली अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नया सिस्टम तैयार किया है। विभिन्न केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और राज्य जब भी कोई ऐसा केस आईएएस की कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी यानी ‘डीओपीटी’ को भेजेंगे तो उन्हें वह सब जानकारी चार तरह के प्रोफार्मा में भर कर देनी होगी। इसमें कई चेक लिस्ट भी रहेंगी।

डीओपीटी को भेजे जाने वाले इन चार प्रोफार्मा में रहेगी जांच रिपोर्ट
इसके चलते केस के निपटारे में होने वाली अनावश्यक देरी नहीं होगी और बेवजह एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक फाइलें भेजने की पुरानी परंपरा भी खत्म हो जाएगी।डीओपीटी ने पहले भी सभी राज्यों और केंद्रीय विभागों को चेक लिस्ट भेजी थी, लेकिन उसका बड़े स्तर पर पालन नहीं हो सका। अब नई चेक लिस्ट/प्रोफार्मा तैयार किए गए हैं। चार तरह के प्रोफार्मा में किसी भी अधिकारी के खिलाफ हुई जांच से संबंधित तमाम विषय वस्तु शामिल रहेगी।

डीओपीटी के मुताबिक, अनुशासनात्मक कार्रवाई से संबंधित अनेक केसों में असामान्य और अकथनीय देरी जैसे कारण सामने आते रहे हैं। इस वजह से कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी की राह में किसी केस को समय रहते उसके तार्किक अंत तक पहुंचाने में कई तरह की बाधाएं आ जाती हैं। लंबे समय तक ऐसे केस लटके रहते हैं। ये देरी मुख्य तौर से दस्तावेजों और सही प्रक्रिया का पालन न करने की वजह से होती है। अथॉरिटी और राज्यों के बीच पत्राचार चलता रहता है।

ये चेक लिस्ट सिंगल विंडो सिस्टम के तहत डीओपीटी में होंगी जमा
इन सब बाधाओं से निजात पाने के लिए अब नई चेक लिस्ट तैयार की गई हैं। केस से जुड़ी हर तरह की बात और दस्तावेज एक साथ आ जाएं, इसके लिए चार प्रोफार्मा तैयार किए गए हैं। ये चेक लिस्ट सिंगल विंडो सिस्टम के तहत डीओपीटी में जमा होंगी। अथॉरिटी का प्रयास है कि जिस अधिकारी पर आरोप लगे हैं, उसका केस रिटायरमेंट से छह माह पहले ही डीओपीटी के पास पहुंच जाना चाहिए।

पहले प्रोफार्मा में सर्विस का नाम, बैच व कैडर के अलावा उसका पद और समयावधि आदि जानकारी रहती है। इसी में ज्वाइनिंग की तिथि और रिटायरमेंट से संबंधित डिटेल भी रहती है। जांच से संबंधित मौखिक जानकारी का पार्ट भी इसी प्रोफार्मा में होता है।

नियुक्ति करने वाले अनुशासनात्मक अधिकारी की डिटेल और आदेशों की कॉपी लगानी होगी साथ
दूसरे प्रोफार्मा में केस रिकॉर्ड की डिटेल, जिसमें शिकायत, प्रारंभिक जांच, सस्पेंशन के आदेश की कॉपी, क्या उस केस में कई अधिकारी शामिल हैं, चार्जशीट तैयार करने वाले अधिकारी का जवाब व जिस पर चार्ज लगे हैं, उस अफसर के जवाब की कॉपी भी शामिल रहती है। अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जिम्मेदारी अथॉरिटी का नोट व जांच अधिकारी की नियुक्ति करने वाले अनुशासनात्मक अधिकारी की डिटेल और आदेशों की कॉपी साथ लगानी होगी।

प्रोफार्मा में इन सभी तथ्यों के सामने हां या ना में जवाब देना है। साथ ही उसी कॉलम में केस के दस्तावेजों का पेज क्रमांक भी लिखना होगा। राज्य अथॉरिटी द्वारा किसी अधिकारी के खिलाफ जो जांच कई गई है, उसकी प्रक्रिया क्या है, ये बताना पड़ेगा। जांच अधिकारी ने चार्ज अफसर को रिपोर्ट दी है या नहीं, दोषसिद्धि रिपोर्ट, एफआईआर व अदालत का निर्णय, कारण बताओ नोटिस, अपील का विवरण, केस का रिव्यू, पेंशन केस और विभागीय विजिलेंस के दस्तावेज आदि भी लगाने होंगे।