Indian Railway: If there is any problem in rail travel, then complain here,  the problem will be resolved immediately | Indian Railway: रेल सफर में हुई  कोई परेशानी तो यहां करें शिकायत,

रेलवे में इन दिनों क्वार्टर अपग्रेडशन की होड़ लग गई है। हर रेलकर्मी टाइप-3 और टाइप-4 क्वार्टर के हकदार हो गए हैं, लेकिन धनबाद में रेलवे के पास इतने क्वार्टर ही नहीं कि सबके के दावों को पूरा किया जा सके। रेलवे ने नए संशोधन के तहत रेलकर्मियों के क्वार्टर पात्रता में बदलाव किया है। लिहाजा धनबाद डिवीजन में रहनेवाले आधे से अधिक रेलकर्मियों का बेहतर क्वार्टर का दावा बन रहा है।

रेलवे बोर्ड ने मास्टर सर्कुलर 49 (संशोधित) के तहत रेलकर्मियों के क्वार्टर पाने की पात्रता में बदलाव किया है। संशोधन के अनुसार 1800 से कम ग्रेड पे पाने वाले कर्मचारी ही टाइप वन में रहेंगे जबकि धनबाद में रेलवे के 36 सौ क्वार्टर है। इनमें सबसे अधिक टाइप वन क्वार्टर ही हैं। 1800 से 2400 तक ग्रेड पे पानेवाले कर्मियों को रेलवे को टाइप टू क्वार्टर देना है। वहीं 2400 से 4200 तक के ग्रेड पे पानेवाले रेल कर्मचारियों को टाइप थ्री क्वार्टर मुहैया कराया जाना है। डीआरएम ऑफिस सहित अन्य जगहों पर रेलवे में काम करनेवाले सबसे अधिक कर्मचारी इसी स्लैब में हैं। संशोधित सर्कुलर जारी होते ही रेलकर्मियों ने बेहतर क्वार्टर के लिए दावा ठोंकना शुरू कर दिया है। रेलवे की असली मुसीबत यहीं से शुरू होती है। इसी तरह 4200 से अधिक ग्रेड पे पानेवाले कर्मचारी टाइप-4 क्वार्टर के हकदार हैं।

कौन से कर्मचारी किस टाइप क्वार्टर के हकदार

सेकंड फायरमैन जो 1800 ग्रेड पे वाले हैं, उन्हें टाइप टू क्वार्टर देना है। इसी तरह 1900 ग्रेड पे पानेवाले सीनियर सेकंड फायरमैन, फायरमैन-1, असिस्टेंट लोको पायलट, असिस्टेंट गार्ड और ब्रेक्समैन भी टाइप टू क्वार्टर के हकदार हैं। जबकि लोको पायलट शंट-2, सीनियर फायरमैन-1, सीनियर असिस्टेंट लोको पायलट, सीनियर असिस्टेंट गार्ड और सीनियर ब्रेक्समैन और गुड्स गार्ड टाइप थ्री तथा लोको पायलट शंट-1, गार्ड पैसेंजर, सीनियर गुड्स गार्ड, मेल-एक्सप्रेस गार्ड, लोको पायलट पैसेंजर/गुड्स का टाइप फोर क्वार्टर का दावा बनता है।

बन रहे नए क्वार्टर, पर नहीं हैं पर्याप्त

धनबाद के बेकारबांध में रेलवे आठ यूनिट टाइप थ्री क्वार्टर बना रहा है। इसी तरह आठ यूनिट टाइप फोर व चार यूनिट टाइप फाइव क्वार्टर भी बनाए जा रहे हैं लेकिन रेलकर्मियों की मांग के आगे यह काफी कम है। अब रेलवे को क्वार्टरों की मांग पूरी करने के लिए वृहद पैमाने पर योजना बनानी पड़ेगी। रेलवे सभी कॉलोनियों में क्वार्टरों को अपग्रेड करने का भी काम कर रहा है। स्पेशल टाइप टू को भी टाइप थ्री का दर्जा दिया जा रहा है।

बाहर के कर्मचारी ही मांग रहे क्वार्टर

क्वार्टरों की किल्लत तब है, जब बाहर से धनबाद आने वाले रेलकर्मी भी क्वार्टर पर दावा कर रहे हैं। जो रेलकर्मी पहले से धनबाद में हैं, वे क्वार्टर के बदले अपना एचआरए ले रहे हैं। इसके बदले या तो वे अपना घर बना लेते हैं या फिर फ्लैट खरीद कर उसी में शिफ्ट हो जाते हैं। कई रेलकर्मी ऐसे भी हैं, जो किराए के मकान में रह रहे हैं। एचआरए से होम लोन की ईएमआई की भरपाई करनेवालों की भी संख्या अच्छी है।