भारतीय रेलवे ने अपने कर्मचारियों को बड़ी राहत देने का ऐलान किया है. रेल मंत्रालय की ओर से जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक ऐसे कर्मचारी या अधिकारी जिनका रेलवे में सेलेक्शन 1.1.2004 के पहले हो गया था लेकिन किसी कारण से वे सर्विस ज्वॉइन नहीं कर पाए थे उन्हें पुरानी पेंशन स्कीम का फायदा मिलेगा.इस संबंध में दक्षिण रेलवे (southern Railway) ने निर्देश जारी कर दिए हैं.

जिन कर्मचारियों को पुरानी पेंशन स्कीम का फायदा लेना है उन्हें सिर्फ एक मौका दिया जाएगा. दक्षिण रेलवे  की ओर से जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक जिन भी कर्मचारी को पुरानी पेंशन स्कीम का फायदा लेना है उन्हें 30 सितम्बर 2020 के पहले इसकी जानकारी रेलवे को देनी होगी. इस सुविधा के लिए रेलवे की ओर से एक फॉर्म जारी किया गया है जिसे भर कर जमा करना होगा.

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक रेलवे बोर्ड की ओर से जारी की गई नई पॉलिसी के तहत ऐसे कर्मचारियों और अधिकारियों को new pension scheme से old pension scheme में  जाने के लिए one time option दिया गया है,जिनका प्रशासनिक कारणों से जैसे, एजुकेशन और पुलिस वेरिफिकेशन में देरी, मेडिकल में कुछ समस्या, कोर्ट केस सहित अन्य कारणों से ज्वॉइनिंग में लेट हुआ हो. ये फायदा सिर्फ उन कर्मचारियों या अधिकारियों को ही मिलेगा जनिका रिजल्ट और भर्ती की बाकी प्रक्रिया तो 31.12.2003 से पहले पूरी हो गई थी लेकिन वे नौकरी ज्वॉइन नहीं कर पाए थे. ऐसे कर्मचारियों जिन्होंने अपने निजी कारणों के चलते नौकरी ज्वॉइन नहीं की थी उन्हें इस स्कीम का फायदा नहीं मिलेगा.        

पुरानी पेंशन स्कीम के फायदे को देखते हुए ज्यादार कर्मचारी और अधिकारी पुरानी पेंशन स्कीम की मांग करते रहते हैं. रेलवे सहित कई अन्य कर्मचारी यूनियनें भी पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर आए दिन आंदोलन करते रहते हैं. देश की तीनों सेनाओं के लोगों को पुरानी पेंशन योजना के तहत ही पेंशन मिलती है.

OPS वह पेंशन योजना थी जिसमें पेंशन अंतिम ड्रॉन सैलरी के आधार पर बनती थी. OPS में महंगाई दर बढ़ने के साथ डीए (महंगाई भत्‍ता) भी बढ़ जाता था. जब सरकार नया वेतन आयोग लागू करती है तो भी इससे पेंशन में बढ़ोतरी होती है.  

पहली अप्रैल 2004 से नई पेंशन योजना (NPS) लागू की गई है. NPS में नए कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय पुराने कर्मचारियों की तरह पेंशन और पारिवारिक पेंशन के लाभ नहीं मिलेंगे. इस योजना में नए कर्मचारियों से वेतन और महंगाई भत्ते का 10% अंशदान लिया जाता है. इतना ही अंशदान राज्‍य या केंद्र सरकार या संबंधित संस्था को करना होती है.