सैलरी कट का पैसा वापस मिलने की ज्यादा उम्मीद है क्योंकि चुनाव नजदीक हैं, और राज्य सरकार इस मांग को पूरा कर सकती है।

केरल के सरकारी कर्मचारियों को अप्रैल से अगस्त तक के छह दिनों के वेतन में कटौती का सामना करना पड़ा था। कोरोना संकट के चलते उपजे हालातों से निपटने के लिए यह कटौती कुल एक महीने के वेतन के बराबर है। सेवा संगठनों ने इस वेतन कटौती को चुकाने के लिए हामी भरना शुरू कर दिया है। सैलरी कट का पैसा वापस मिलने की ज्यादा उम्मीद है क्योंकि चुनाव नजदीक हैं, और राज्य सरकार इस मांग को पूरा कर सकती है।

ऐसे में कहा जा रहा है कि देय राशि को पीएफ के पैसे के रूप में भी वापस किया जा सकता है। वित्त मंत्री के कार्यालय ने कहा कि इस पर एक स्पष्ट निर्णय लेना बाकी है। इस फैसले से आगामी चुनावों के मद्देनजर कर्मचारियों को सरकार राहत दे सकती है।

वेतन कटौती का फैसला राज्य के स्वामित्व वाले सभी उद्यमों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, अर्ध-सरकारी संगठनों, विश्वविद्यालयों आदि पर भी लागू हुआ था। एक आयोग वर्तमान में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के वेतन संशोधन पर साक्ष्य एकत्रित कर रहा है। यह रिपोर्ट संभवतः दिसंबर में प्रस्तुत की जाएगी। उस स्थिति में, चालू वित्त वर्ष में वेतन संशोधन की घोषणा की जा सकती है।

वहीं कोरोना संकट के बीच तेलंगाना सरकार ने राज्य भर के सरकारी शिक्षण अस्पतालों में शिक्षकों के वेतन में वृद्धि के लिए एक आदेश पारित किया है। काफी समय से लंबित इस मांग को साढ़े चार साल बाद पूरा किया गया है।