रेलवे अपने उम्रदराज कर्मचारियों को वक्त से पहले रिटायरमेंट देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए कर्मचारियों के काम की समीक्षा की जा रही है। इसमें वे कर्मचारी शामिल हैं जिनकी 55 साल उम्र या 30 साल की नौकरी पूरी हो गई है। उनको आवश्यक सेवानिवृत्ति दी जाएगी। मंडल में ऐसे 1300 कर्मचारी हैं। दिसंबर तक इसकी रिपोर्ट को मुख्यालय के पास भेजा जाना है।

रेलवे के कदम निजीकरण की तरफ बढ़ रहे हैं। संरक्षा श्रेणी के ही सिर्फ खाली पद भरे जा रहे हैं। साथ ही ऐसे कर्मचारियों को भी आवश्यक सेवानिवृत्ति देने की तैयारी चल रही है, जिनकी 55 साल उम्र या 30 साल की नौकरी पूरी हो गई है। ऐसे कर्मचारियों की शारीरिक या मानसिक रूप से फिट न होना, उपस्थिति, समयबद्धता, कार्यप्रणाली, अनुशासन आदि बिंदुओं पर समीक्षा की जा रही है।

विभागाध्यक्ष ऐसे कर्मचारियों के पिछले पांच साल की सेवा की समीक्षा कर रहे हैं। ऐसे कर्मचारियों की सूची बनाने के निर्देश दिए गए हैं। दिसंबर तक ऐसे कर्मचारियों की सूची मुख्यालय भेजी जाएगी। मंडल के सभी 158 स्टेशन, डीआरएम ऑफिस, रेलवे अस्पताल, रेलवे कॉलोनी क्षेत्र में 16 हजार, कोच व वैगन मरम्मत कारखाने में 4700 व सिंधौली कारखाने में 450 कर्मचारी कार्यरत हैं।

रेलवे की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए रेलवे में तीन लाख पद कम किए जाएंगे। फिलवक्त डेढ़ लाख पद रिक्त चल रहे हैं और ऐसे में डेढ़ लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जाएगा। रेलवे बोर्ड के स्तर पर इसकी कवायद शुरू हो कर दी गई है। रेलवे में निजीकरण और निगमीकरण के चलते कर्मचारी की आवश्यकताओं में भी आएगी। बोर्ड के इस निर्णय एवं पत्राचार से रेलवे के कर्मचारियों में खलबली मच गई है।

रेलवे सूत्रों की माने तो तेरह लाख कर्मचारियों के स्वीकृत पद रेल में है। जिसमें से लगभग डेढ़ लाख पद रिक्त चल रहे हैं। रेल मंत्रालय रेलवे को कर्मियों की संख्या के हिसाब से राइट साइजिग करने जा रही है। इसका अभिप्राय है कि अनावश्यक पदों को समाप्त किया जाए। रेलवे में हर साल संरक्षा कोटी को छोड़कर पदों की कटौती की जाती है। अब रेलवे में कुल 10 लाख कर्मचारी रखने की योजना है। यानी तीन लाख पद कम किए जाएंगे। इधर डेढ़ लाख पद जो रिक्त चल रहे हैं, उन्हें समाप्त किए जाने की योजना गुपचुप तरीके से रेल प्रशासन तैयार करने में जुट गई है।