केंद्र सरकार के दिव्यांग कर्मचारियों को मोदी सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने विकलांग व्यक्तियों के अधिकार एक्ट (आरपीडब्ल्यूडी)- 2016 पर स्पष्टीकरण दिया है। सरकार ने कहा है कि जो दिव्यांग सरकारी कर्मी अपनी मुश्किलों के चलते स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) मांगते हैं, वे उन्हीं वेतनमान और लाभों के साथ सेवा में बने रह सकते हैं।

हाल ही में जारी एक ऑर्डर में कार्मिक मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण पेश किया। ऑर्डर में दिव्यागों को एक्ट के तहत मिलने वाले अलग-अलग प्रोटेक्शन का उल्लेख है। सरकार ने साफ किया है कि दिव्यांगों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव स्वीकार्य नहीं माना जा सकता।

विकलांग व्यक्तियों के अधिकार एक्ट (आरपीडब्ल्यूडी)- 2016 की धारा 20 के प्रावधानों का हवाला देते हुए, यह कहा गया कि सरकारी संस्थानों को विकलांग कर्मचारियों को उचित और अनुकूल वातावरण मुहैया करना होगा। दिव्यांगता के आधार पर किसी व्यक्ति को प्रमोशन से नहीं रोका जाएगा। रोजगार से जुड़े मामलों में ऐसे कर्मचारियों से किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय पर आया है जब दिव्यांगता की वजह से हो रहीं कठिनाइयों के आधार पर कर्मचारी वीआरएस के लिए अप्लाई कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्हें अपने अधिकारों के बारे में भी जानकारी का अभाव बताया जा रहा है। अधिकारियों के संज्ञान में आया कि दिव्याग कर्मचारियों को संबंधित कानूनों के तहत प्रदत्त संरक्षण की जानकारी नहीं होती है।

इससे पहले सरकार ने शुक्रवार (4 सितंबर) को कर्मचारियों के लिए सेंट्रल गवर्नमेंट इम्प्लॉई ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम (CGEGIS) की बेनेफिट टेबल जारी कर दी। सेवानिवृत्ति तक, केंद्र सरकार का एक कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारी समूह बीमा योजना (CGEGIS) में योगदान देता रहता है। CGEGIS 1980 योजना बीमा कवरेज के साथ आती है और कर्मचारी के लिए बचत कोष के रूप में भी काम करती है।