रेलवे बोर्ड के सख्त रुख को देखते हुए मंडल स्तर पर सरकारी क्वार्टर का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। राजधानी स्थित रेलवे कॉलोनियों में भी क्वार्टर में किरायेदार रखने के मामले सामने आए हैं। ऐसे 61 मामलों की पहचान की गई है। क्वार्टर खाली कराने और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

रेलवे अधिकारियों का यह भी कहना है कि ऐसी शिकायतें मिली रही थीं कि आवंटित किए गए क्वार्टर में रेलवे कर्मी खुद न रहकर उसको किराये पर दे देते हैं। इसके मद्देनजर रेलवे बोर्ड ने जनवरी में ही सभी मंडल रेलवे को पत्र लिखकर कार्रवाई करने को कहा था। लेकिन, कोरोना महामारी की वजह से मामला शांत हो गया था। अब एक बार फिर से रेलवे बोर्ड इसे लेकर गंभीर है।

27 जुलाई को दोबारा पत्र जारी करके सभी मंडल रेल प्रबंधकों (डीआरएम) से इस मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई थी। अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया था कि रेल मंत्री खुद इस मामले की निगरानी कर रहे हैं, इसलिए इसमें किसी तरह की कोताही नहीं होनी चाहिए। इसका असर भी हुआ और अब कार्रवाई शुरू हो गई है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर दिल्ली में 465 रेलवे क्वार्टरों का औचक निरीक्षण किया गया। इस दौरान 61 क्वार्टर में रेलवे कर्मी के बजाय किरायेदार पाए गए। इनमें से 32 कर्मचारियों जिनके नाम से क्वार्टर आवंटित थे, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। सात कर्मचारियों का मामला उच्च अधिकारी के पास विचाराधीन है। वहीं, 22 क्वार्टर खाली कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने वाले रेल कर्मियों के खिलाफ नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।