Indian Railways Latest News: From Kota to Dehradun, New Delhi to Indore;  Full List of 80 Trains to be Operated From Sept 12 | Departure, Arrival  Station Details Here | India.com

रेलवे में एक तरफ 55 वर्ष से अधिक उम्र या 30 वर्ष नौकरी पूरी करने वाले कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्ति की चर्चा है, दूसरी तरफ कुछ ऐसे भी कर्मचारी हैं जो सेवानिवृत्ति की निर्धारित सीमा से अधिक नौकरी कर ले रहे हैं। यांत्रिक कारखाने में पेंटर ग्रेड वन के पद पर तैनात रेलकर्मी महेंद्र प्रताप ने तो दस माह अधिक नौकरी कर ली। रेलवे प्रशासन को होश आया तो आनन-फानन उसे सेवानिवृत्ति दी है। अब वेतन रिकवरी की तैयारी चल रही है।

अक्‍टूबर में ही हो जाना चाहिए रिटायर वास्तविक उम्र के आधार पर रेलकर्मी को 31 अक्टूबर 2019 को ही सेवानिवृत्त हो जाना चाहिए था, लेकिन वह निर्धारित अवधि के बाद भी अपने पद पर कार्य करता रहा। कारखाना प्रबंधन ने भी बेपरवाह रहा। जबकि, सेवानिवृत्ति के एक वर्ष पूर्व ही रेलवे प्रशासन संबंधित रेलकर्मी को आगाह कर देता है। कार्मिक तथा लेखा विभाग भी कर्मचारी की सेवा पुस्तिका सहित संबंधित अभिलेखों को दुरुस्त करने में जुट जाता है। रेलकर्मी 31 अगस्त 2020 तक रेलवे को अपनी सेवाएं देता रहा।

31 अगस्‍त को किया रिटायर फिलहाल, रेलवे प्रशासन ने हाईस्कूल और मेडिकल फिटनेस प्रमाणपत्र में दर्ज आयु का हवाला देते हुए रेलकर्मी के दस माह की अधिक सेवा को अनियमित मानते हुए उसे 31 अगस्त को सेवानिवृत्त कर दिया। मामला प्रकाश में आने के बाद रेलकर्मियों ने सिस्टम पर सवाल खड़ा किया है। उनका कहना है कि कर्मचारी का इसमें कोई दोष नहीं है। रेलवे अगर दस माह का वेतन काटता है तो उसके कीमती समय और किए गए सेवाकार्य की भरपाई कौन करेगा। यह केवल एक तरफ की चूक नहीं है। दोनो तरफ से चूक हुई है। इस‍के लिए यदि रेल कर्मचारी दोषी है तो उतने ही जिम्‍मेदारी रेलवे की बनती है। रेलवे आखिर कर्मचारियों के विवरण के लिए विभाग बनाया है। यह संबंधित विभाग की पूरी जिम्‍मेदारी बनती है। पूर्वोत्‍तर रेलवे के सीपीआरओ का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।