Indian Railways

रेलवे अब कर्मचारियों की सुविधा में कटौती कर रही है। जिसका विरोध शुरू हो गया है। रेलवे के गार्ड व इंजन चालक को मिलने वाले लाइन बॉक्स को लेकर विवाद गहराने लगा है। रेल प्रशासन ने अगस्त माह में लाइन बॉक्स बंद करने का निर्णय लिया है। जिसका रनिग कर्मचारियों ने विरोध शुरू कर दिया।

अब तक दो बार कर्मचारी संगठन व रेल प्रशासन की बात हो चुकी है, लेकिन मामले का समाधान नहीं निकल पाया है। लाइन बॉक्स रेलवे की पहचान रहा है। अब रेलवे इस बॉक्स को बंद कर रही है। देश में एक जोन में इसे बंद भी किया जा चुका है। ईस्टन रेलवे के मालदा डिवीजन के अंतर्गत भागलपुर जमालपुर किऊल रेल खंड के गार्ड, चालक के अंदर भी इस बात को लेकर विरोध देखा जा रहा है।

दरअसल लाइन बॉक्स रेलवे के गार्ड और चालक को मिलने वाला स्टील का काला बक्सा है, जो प्लेटफार्म पर ट्रेन आते समय चढ़ाया या उतारा जाता है। यह रेलवे की सालों पुरानी व्यवस्था है, जो अब बंद हो रही है। इस बॉक्स में ट्रेन परिचालन के नियम की किताब, टेल बोर्ड, एचएस लैंप, टेल लैंप, फस्ट एड बॉक्स, डिटोनेटर या पटाखे और जनरल बुक होती है। डिटोनेटर या पटाखे कोहरे में दौरान उपयोग किये जाते हैं।

इस मामले पर रेलवे कर्मचारी खुलकर विरोध करने लगे हैं। कर्मचारी यूनियन का तर्क है कि लाइन बक्स के सामान की वजन लगभग 15 किलोग्राम होता है। ऐसे में कर्मचारियों को अपने खाने पीने का सामान भी साथ ले जाना होता है। जिससे उसके पास पहले से ही कई किलो वजन रहता है और जिन गार्ड और चालक की उम्र ज्यादा है, वह अपने सामान के साथ लाइन बॉक्स के उपकरण कैसे ले जा सकेंगे। भारतीय रेल में अब गाड़ियों की लंबाई भी बढ़ती जा रही है, तब गार्ड या चालक लॉबी तक कैसे अपने सामान को ले जा पाएंगे।

वहीं, लाइन बॉक्स बंद होने के बाद अब गार्ड और चालक को सभी उपकरण और बुक्स अपने साथ ले जानी होगी। अभी तक इसके लिए रेलवे में बॉक्स बॉय की भर्ती होती थी। जो ट्रेन के आने के बाद लाइन बॉक्स को चढ़ाता या उतार कर लाता था। लेकिन रेलवे ने इस पद पर भी भर्ती बंद कर निजी ठेकेदार के हवाले कर दिया। इसलिए चालक और गार्ड को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।