Chhatrapati Shivaji Terminus / C S T Station / (V T) Mumbai Bombay ...

हाइलाइट्स:

  • अपनी भव्य इमारत के लिए पहचाने जाने वाले देश के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पहले विक्टोरिया टर्मिनस के नाम से जाना जाता था
  • इस स्टेशन को कामर्शियल डेवलपमेंट के लिए 60 साल तक जबकि रेसिडेंसियल डेवलपमेंट के लिए 99 साल की लीज पर निजी कंपनी को सौंपा जाएगा
  • देश के कुछ और रेलवे स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने के लिए टेंडर की प्रकिया इस समय विभिन्न चरणों से गुजर रही है

अपनी भव्य इमारत के लिए पहचाने जाने वाले देश के व्यस्ततम रेलवे स्टेशनों में से एक छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (पहले विक्टोरिया टर्मिनस) भी अब निजी हाथों में जाएगा। इसके रिडेवलपमेंट के लिए रेल मंत्रालय ने टेंडर मंगा लिया है। इस स्टेशन को कामर्शियल डेवलपमेंट के लिए 60 साल, जबकि रेसिडेंसियल डेवलपमेंट के लिए 99 साल की लीज पर निजी कंपनी को सौंपा जाएगा। देश के कुछ और रेलवे स्टेशनों को निजी हाथों में सौंपने के लिए टेंडर की प्रकिया इस समय विभिन्न चरणों से गुजर रही है।

PPAC से मिल चुकी है पहले ही मंजूरी
रेल मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस की निजीकरण परियोजना को पहले ही पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप एप्रेजल कमेटी (PPPAC) की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। अब, इसके लिए बोली प्रक्रिया शुरू की गई है। इस प्रक्रिया में चयनित बोलीदाता को इस स्टेशन के रिडेवलपेंट की जिम्मेदारी मिलेगी। साथ ही उन्हें आसपास की रेलवे की जमीन भी मिलेगी, जिस पर वाणिज्यिक और आवासीय निर्माण किये जाएंगे। कामर्शियल डेवलपमेंट के लिए 60 साल की लीज मिलेगी जबकि रेसिडेंशियल डेवलपमेंट के लिए 99 साल की लीज। साथ ही कंशेसन बेसिस पर स्टेशन के आपरेशन एवं मेंटनेंस की जिम्मेदारी भी चयनित कंपनी की ही होगी।

गोथिक शैली में हुआ निर्माण
वर्ष 1887 में विक्टोरिया टर्मिनस के नाम से बने इस स्टेशन की बिल्डिंग को बनाने में उस समय 16.13 लाख रुपए की लागत आई थी। इस भवन का निर्माण भारतीय वास्तुकला को ध्यान में रखते हुए गोथिक शैली में किया गया है। यह इंग्लिश के अक्षर ‘सी’ के आकार में संतुलित तथा योजनाबध्द तरीके से पूर्व और पश्चिम दिशा में बनाया गया है। इस बिल्डिंग का मुख्य आकर्षण इसका केंद्रीय गुंबद हैं, जिसके ऊपर ग्रोथ को दर्शाने वाली 16 फीट 6 इंच बड़ी प्रतिमा लगी है।

यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है स्टेशन बिल्डिंग
इसके वास्तु वैभव को देखते हुए वर्ष 2004 में यूनेस्को ने इसे ‘विश्व विरासत’ की सूची में शामिल किया था। इसका डिजाइन विक्टोरिया और मुगलकालीन आर्किटेक्चर से प्रभावित है। सीएसटी का डिजाइन ब्रिटेन के बहुत से रेलवे स्टेशनों से मिलता-जुलता है।

चार बार बदला जा चुका है इसका नाम
अंग्रेजों ने जब भारत में रेल का परिचालन शुरू किया, तब मुंबई के बोरीबंदर इलाके में बने इस स्टेशन को बोरीबंदर स्टेशन के नाम से जाना जाता था। वह इलाका ग्रेट इंडियन पेनिनस्यूला रेलवे के पास था। उसने नए सिरे से स्टेशन के निर्माण के लिए मई 1878 में काम शुरू किया था और यह 1888 में बनकर तैयार हो गया। सन् 1887 में महारानी विक्टोरिया के शासन की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस भवन का नाम ‘विक्टोरिया टर्मिनस’ रखा गया बाद में सन् 1996 में इसका नाम विक्टोरिया टर्मिनस से बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस रखा गया। बाद में इसका नाम छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस कर दिया गया।

वहीं हुआ था सबसे बड़ा आतंकी हमला
वर्ष 2008 में मुंबई पर बड़ा आतंकी हमला हुआ था। इस हमले में सबसे पहले सीएसएमटी को ही टार्गेट किया था। आतंकवादी अजमल कसाब और उसके साथियों की वहां हुई फायरिंग में 58 लोगों की मौत हुई थी। उस हमले की वजह से वह रेलवे स्टेशन पूरे वर्ल्ड में सुर्खियों में आया था।