Coronavirus: संक्रमण में भी घर नहीं बैठ रहीं रेलवे की महिला लोको पायलट, दौड़ा रहीं ट्रेन Gorakhpur News

अब महिलाएं चुनौतीपूर्ण मोर्चे पर भी पुरुषों के साथ कदमताल करने लगी हैं। खुद को साबित करने के साथ अन्य महिलाओं को प्रेरित भी कर रही हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर में वर्ष 2012 तक एक भी महिला सहायक लोको पायलट नहीं थी। आज छह सहायक लोको पायलट इस कोरोना काल में भी एक्सप्रेस और मालगाडिय़ां दौड़ा रही हैं।

15 सहायक लोको पायलट और एक महिला गार्ड दे रहीं चुनौती गोरखपुर सहित लखनऊ मंडल में 15 सहायक लोको पायलट और एक महिला गार्ड तैनात हैं। गोरखपुर-गोंडा, गोरखपुर-नौतनवां और गोरखपुर-कप्तानगंज रूट पर एक्सप्रेस और मालगाडिय़ां लेकर चल रही हैं।  स्टेशन यार्ड में रेक और कोचों की शंङ्क्षटग  भी कर रही हैं।  हालांकि  216 पुरुष लोको पायलट और 354 सहायक लोको पायलट के सामने इनकी संख्या बहुत कम है। लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने महिलाओं के लिए एक अलग माहौल तैयार किया है। परिणाम सामने हैं। वर्ष 2013 में गोरखपुर में एक महिला सहायक लोको पायलट थी।  वर्ष 2016 में दो बढ़ीं। वर्ष 2017 में तीन महिलाओं की तैनाती हुई। आज कुल छह सहायक लोको पायलट हो गई हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के सहायक मंडल यांत्रिक इंजीनियर पॉवर एसपी ङ्क्षसह कहते हैं कि महिला कर्मियों के लिए बेहतर माहौल तैयार हो रहा है। आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी।

मिल रहीं यह सुविधाएं इनके लिए रेलवे की तरफ से रनिंग रूम में अलग से वेटिंग रूम और प्रसाधन केंद्र की व्‍यवस्‍था है। इसके अलावा लॉबी में भी अलग से प्रसाधन केंद्र की सुविधा भी उपलब्‍ध है। इससे इन्‍हें किसी तरह की कोई परेशानी होती है।

जानें, क्‍या हैं इनका अनुभव सहायक लोको पायलट रूबी कुमारी का कहना है कि पूर्वोत्तर रेलवे में महिलाओं को भी अपने आप को साबित करने का मौका मिलने लगा है। चुनौतियों का सामना करने में अच्‍छा लगता है। गोरखपुर, लखनऊ मंडल की जागृति त्रिपाठी का कहना है कि चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरे कार्य भी महिलाएं स्वीकार करते हुए दक्षता के साथ कर रही हैं। पूर्वोत्तर रेलवे सहित हर क्षेत्र में महिलाओं को समान अवसर मिल रहे हैं।