Bootstrap Business: The Significance Of An Increase In Demand For ...

रेलवे में कुल 13 लाख कर्मचारी लेकिन इनमें से हजारों रेलकर्मी ऐसे हैं जिनकी आर्थिक हालत अच्छी नहीं हैं। इन रेलकर्मियों को रेलवे के ही सूदखोर अपने चंगुल में फंसा रहे हैं। रेलवे में लगातर सूदखोरों का जाल फैलता जा रहा लेकिन ऐसे लोगों पर कोई भी कार्रवाई नहीं की जा रही है जिसके कारण कई कर्मचारियों को प्रताड़ित होना पड़ रहा है।

दरअसल रेलवे के चतुर्थ श्रेणी और ग्रुप सी के कर्मचारियों को सूदखोरी की समस्या से परेशान होना पड़ रहा है। रेलवे में अच्छा खासा वेतन होने के बावजूद भी रेलवे कर्मचारी सूदखोरों के जाल में फंसते जा रहे है यह बात समझ से परे है इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक कारण हैं। अगर हम भारत की बात करें तो यहाँ पर किसी भी उद्योग में मोनोचिकिस्त्क को नहीं रखा जाता है जबकि विदेशों में हर कर्मचारी के दिमागी संतुलन की जांच मनोचिकित्सक द्वारा समय समय पर की जाती है। रेलवे में कई नौजवान अच्छे खासे वेतन की चकाचौंध में आकर अपने खर्चे बड़ा लेते हैं और जैसे जैसे परिवार की जिम्मेदारी बढती है वैसे वैसे कर्ज के बोझ तले दबते चले जाते हैं। सूदखोर इन्ही परिस्तिथियों का फायदा उठाकर इन्हें घेर लेते हैं और फिर जीवन भर रेलवे कर्मचारी इनके जाल से निकल नहीं पाते। अंत में सूद इतना हो जाता ही कि किश्त केवल सूद में ही अदा हो जाती है और मूल कर्ज वहीँ का वहीँ खड़ा रहता है।

सूदखोरों रख लेते हैं चैकः सूदखोर रेलवे कर्मचारियों के खाली चेक और एटीएम कार्ड रख लेते हैं। खाली चेक रेलवे कर्मचारी को डराने के लिए लिया जाता है ताकि किश्त न देने की अवस्था में रेलवे कर्मचारी का चेक बैंक में लगाकर उस पर केस किया जा सके

ऐसे होता है खेलः स्थानीय पुलिस के अलावा आरपीएफ में भी रेलवे कर्मचारियों ने ऐसी कई शिकायतें की हैं जो रेलवे में आर्थिक रूप से परेशान लोगों को निशाना बनाते हैं। सूदखोर ऐसे लोगों को पहले मदद के नाम पर रुपये देते हैं और जितना बन सके लौटा देने की बात करते हैं। बाद में ब्याज के रूप में थोड़ी-थोड़ी रकम लेते हुए दिया हुआ पैसा वापस ले लेते हैं। इसके बाद प्रताड़ित करने वाला खेल शुरू हो जता है। सूदखोर दोबारा मूलधन वापस लेने या उस पर ब्याज वसूलने के लिए धमकी देकर दबाव बनाते हैं। बहुत से रेलवे कर्मचारी सूदखोरों का कर्ज उतारने के लिए स्वैछिक रिटायरमेंट लेते हैं और कर्ज रिटायरमेंट के पैसे से चुकाते हैं।