niti aayog

हाइलाइट्स:

  • रेलवे ने दावा किया है कि इस साल रेलवे में एक भी मौतें नहीं हुई हैं और 2019-20 में सिर्फ 5 लोगों की मौत हुई है
  • सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने रेलवे के उस दावे पर सवाल उठाए हैं
  • मुंबई के सबअर्बन रेल नेटवर्क में हर साल करीब 2000 लोगों की मौत होती है
  • अमिताभ कांत ने अपनी बात रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वी के यादव को 24 जुलाई को लिखे एक लेटर में कही है

सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने रेलवे के उस दावे पर सवाल उठाए हैं, जिसमें रेलवे ने कहा है कि इस साल रेलवे में एक भी मौतें नहीं हुई हैं और 2019-20 में सिर्फ 5 लोगों की मौत हुई है। नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि क्या ये आंकड़े वाकई सच्चे हैं क्योंकि मुंबई के सबअर्बन रेल नेटवर्क में हर साल करीब 2000 लोगों की मौत होती है।

अमिताभ कांत ने अपनी बात रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वी के यादव को 24 जुलाई को लिखे एक लेटर में कही है। ये लेटर उन्होंने राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के साथ हुई तिमाही बैठक की अध्यता के एक दिन बाद लिखा है। उन्होंने कहा कि बहुत से लोगों की मौत मुंबई के सब अर्बन रेलवे में जरूरत से अधिक भरी ट्रेनों से गिरकर या फिर पटरियों के रास्ते एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाते वक्त होती है। उन्होंने लिखा है कि इन मौतों को राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष से अलग नहीं माना जा सकता है उसे रेकॉर्ड करना जरूरी है। अगर इसे नजरअंदाज किया जाता है तो हम कभी भी इससे निपटने का सही तरीका नहीं खोज सकते हैं।

उन्होंने कहा कि रेलवे को सबअर्बन नेटवर्क में चलने वाली ट्रेनों के कोच को डिजाइन करने में पैसे लगाने चाहिए, जिसमें ट्रेनों से गिरने की घटनाएं रोकने के लिए ऑटोमेटिक दरवाजे जरूर होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इन हस्तक्षेप को गंभीरता से ध्यान में रखना चाहिए। रेलवे ने कहा है कि 2019-20 में सिर्फ 5 लोग रेलवे में मरे हैं, जिनमें एक भी यात्री नहीं थे। ये लोग या तो रेलवे के कर्मचारी थे या फिर कॉन्ट्रैक्ट के मजदूर। ट्रेन हादसों में होने वाली मौतों को इसमें शामिल नहीं किया गया है।

नीति आयोग ने सीईओ ने इस बात पर भी ध्यान खींचा कि भले ही राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के तहत रेलवे ने सुरक्षा पर 55 हजार करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन ने कोई भी ऐसी तकनीक रेलवे ने शामिल नहीं की है, जो हादसों के खतरों को कम कर सके। अपने लेटर में उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष के तहत मिले फंड से ट्रेन सिग्नलिंग और टेलिकॉम का काम करने की योजना थी, ताकि ट्रेन प्रोटेक्शन एंड वार्निंग सिस्टम लगाया जा सके।