Indian Railways is linking its trains via ISRO satellites to allow ...

रेलवे की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए रेलवे में तीन लाख पद कम किए जाएंगे। फिलवक्त डेढ़ लाख पद रिक्त चल रहे हैं और ऐसे में डेढ़ लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जाएगा। रेलवे बोर्ड के स्तर पर इसकी कवायद शुरू हो कर दी गई है। रेलवे में निजीकरण और निगमीकरण के चलते कर्मचारी की आवश्यकताओं में भी आएगी। बोर्ड के इस निर्णय एवं पत्राचार से रेल इंजन कारखाना जमालपुर के कर्मचारियों में खलबली मच गई है।

रेलवे सूत्रों की माने तो तेरह लाख कर्मचारियों के स्वीकृत पद रेल में है। जिसमें से लगभग डेढ़ लाख पद रिक्त चल रहे हैं। रेल मंत्रालय रेलवे को कर्मियों की संख्या के हिसाब से राइट साइजिग करने जा रही है। इसका अभिप्राय है कि अनावश्यक पदों को समाप्त किया जाए। रेलवे में हर साल संरक्षा कोटी को छोड़कर पदों की कटौती की जाती है। अब रेलवे में कुल 10 लाख कर्मचारी रखने की योजना है। यानी तीन लाख पद कम किए जाएंगे। इधर डेढ़ लाख पद जो रिक्त चल रहे हैं, उन्हें समाप्त किए जाने की योजना गुपचुप तरीके से रेल प्रशासन तैयार करने में जुट गई है। इसकी सुगबुगाहट जमालपुर कारखाने में भी देखी जा रही है। इस सुगबुगाहट से कारखाना के सात हजार कर्मचारियों के बीच बेचैनी बढ़ गई है। साथ ही डेढ़ लाख कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने के प्रस्ताव को लेकर रेलवे बोर्ड के द्वारा फॉर्मूला पहले ही जारी किया जा चुका है।

बोर्ड के इस प्रस्ताव से रेल कर्मचारियों की उपस्थिति, शारीरिक स्थिति, मानसिक स्थिति, विजिलेंस जांच, भ्रष्टाचार अथवा विभागीय जांच में दोषी पाए जाने आदि आधार पर कर्मचारियों का घर का रास्ता दिखाया जा सकता है। इसके साथ ही अन्य कर्मचारियों की भी नौकरी जा सकती है। हालांकि ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन, पूर्व रेलवे कर्मचारी संघ, रेलवे एससी एसटी एसोसिएशन के आलावे कारखाने के अन्य यूनियन रेलवे बोर्ड के इस निर्णय के विरुद्ध एकजुट होकर इसका विरोध कर रहे हैं। वहीं, यूनियन अब आर पार की लड़ाई एआईआरएफ के बैनर तले लड़ने का कार्य कर रही है।

महाप्रबंधक से बोर्ड ने मांगा है प्रस्ताव रेलवे बोर्ड ने सभी जोन के रेल महाप्रबंधक से पत्राचार कर प्रस्ताव मांगा है कि उनके जोन में रिक्त पद को समाप्त किए जाने को लेकर अनावश्यक पदों का ब्यौरा बनाकर बोर्ड को जल्द से जल्द अवगत करवाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कितने कर्मचारी किस जोन से कम किया जा सकेंगे।

रेल से रेलकर्मी के अस्तित्व को नहीं मिटने दिया जाएगा : सत्यजीत

केंद्र सरकार के साथ मिलकर रेलवे बोर्ड रेल से रेल कर्मियों का अस्तित्व मिटाने की साजिश कर रही है। रेल का निजीकरण एवं निगमीकरण करने की कोशिश की जा रही है। जिसे मेंस यूनियन एआईआरएफ के सहयोग से किसी भी कीमत पर नहीं होने देगी। यह बातें ईस्टर्न रेलवे मेंस यूनियन के केंद्रीय उपाध्यक्ष सत्यजीत कुमार ने कही।

केंद्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि निजीकरण एवं निगमीकरण के खिलाफ एआईआरएफ महासचिव शिव गोपाल मिश्रा रेल मंत्रालय एवं सरकार से वार्ता ही नहीं कर रहे बल्कि रेल हित, कर्मचारी हित के लिए उनपर दबाव भी बना रहे हैं। निश्चित रूप से हम इस लड़ाई में सफल होंगे। भारतीय रेल में निजीकरण एवं निगमीकरण के खिलाफ रेल कर्मियों की एकजुटता इस बात का द्योतक है कि हम इस लड़ाई को जीतेंगे।

Source:- Jagran