Private Trains: Railways Set To Kick Start Race With RFQ For 150 ...

रेल मंत्रालय (Ministry of Railway) ने 109 जोड़ी रूटों पर 151 आधुनिक ट्रेनों के जरिए यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी कंपनियों से आवेदन मांगा है। इस परियोजना में निजी क्षेत्र का निवेश 30 हजार करोड़ रुपये का होगा। ये नई ट्रेनें रेलवे के नेटवर्क पर पहले से चलाई जा रही ट्रेनों के अतिरिक्त होंगी।

हाइलाइट्स

  • सरकार देश में प्राइवेट ट्रेन के लिए बुधवार को आवेदन पूर्व बैठक हुई
  • इसमें बॉम्बार्डियर, ऑल्सटॉम, सीमंस और जीएमआर सहित 23 कंपनियों ने हिस्सा लिया
  • देश में प्राइवेट ट्रेनें मार्च 2023 से चलेंगी, इसके लिए टेंडर मार्च 2021 तक फाइनल कर लिए जाएंगे
  • इस परियोजना में 30 हजार करोड़ रुपये निजी क्षेत्र का निवेश आने की उम्मीद

सरकार देश में प्राइवेट ट्रेन (private train) चलाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी सिलसिले में आज एक आवेदन पूर्व बैठक (pre-application meeting) हुई। इस बैठक में बॉम्बार्डियर, ऑल्सटॉम, सीमंस और जीएमआर सहित 23 कंपनियों ने हिस्सा लिया और देश में निजी ट्रेन चलाने में दिलचस्पी दिखाई। रेलवे की 12 क्लस्टरों में प्राइवेट ट्रेन चलाने की योजना है। बैठक में बीईएमएल, आईआरसीटीसी, बीएचईएल, सीएएफ, मेधा ग्रुप, स्टरलाइट, भारत फॉर्ज, जेकेबी इन्फ्रास्ट्रक्चर और टीटागढ़ वैगंस लिमिटेड ने भी हिस्सा लिया।

रेल मंत्रालय ने 109 जोड़ी रूटों पर 151 आधुनिक ट्रेनों के जरिए यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी कंपनियों से आवेदन मांगा है। इस परियोजना में निजी क्षेत्र का निवेश 30 हजार करोड़ रुपये का होगा। ये नई ट्रेनें रेलवे के नेटवर्क पर पहले से चलाई जा रही ट्रेनों के अतिरिक्त होंगी। यह देश में रेलवे के नेटवर्क पर यात्री ट्रेनें चलाने के लिए निजी निवेश की पहली पहल है। इसके लिए कंपनियों का चयन दो चरणों वाली निविदा प्रक्रिया से किया जाएगा। इसमें पहला चरण रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन (RFQ) और दूसरा चरण रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) है।

कब तक चलेंगी प्राइवेट ट्रेनें सरकार का कहना है कि देश में प्राइवेट ट्रेनें (private train kab se chalengi) मार्च 2023 से चलेंगी। इसके लिए टेंडर मार्च 2021 तक फाइनल कर लिए जाएंगे। रेलवे का कहना है कि यात्री रेलगाड़ी परिचालन में निजी कंपनियों के उतरने से रेलगाड़ियों को तेज गति से चलाने और रेल डिब्बों की टेक्नॉलजी में नया बदलाव आएगा। ज्यादातर प्राइवेट ट्रेन मेक इन इंडिया के तहत भारत में ही बनाई जाएंगी। किराया एसी बस और हवाई किराया को ध्यान में रख कर तय किया जाएगा।

रेवेन्यू मॉडल
रेलवे के मुताबिक प्राइवेट ट्रेन किस तरह परफॉर्म कर रही हैं, उसके लिए एक स्पेशल मैकेनिज्म तैयार किया जाएगा और परफॉर्मेंस रिव्यू होगा। कंपनियों को रेलवे की बुनियादी सुविधाओं, बिजली, स्टेशन और रेलमार्ग इत्यादि के उपयोग का शुल्क भी देना होगा। इतना ही नहीं कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बोलियां लगाकर भारतीय रेलवे के साथ राजस्व भी साझा करना होगा। निजी कंपनियों को समय सारिणी के हिसाब से रेलगाड़ी परिचालन में 95 प्रतिशत समयबद्धता का पालन सुनिश्चित करना होगा। उन्हें प्रति एक लाख किलोमीटर की यात्रा में एक बार से अधिक बार असफल नहीं होने के रेकार्ड के साथ चलना होगा।

किन क्लस्टर पर चलेंगी
सभी प्राइवेट ट्रेन 12 क्लस्टर में चलाई जाएंगी। ये क्लस्टर- बेंगलुरू, चंडीगढ़, जयपुर, दिल्ली, मुंबई, पटना, प्रयागराज, सिकंदराबाद, हावड़ा और चेन्नई होंगे। प्राइवेट ट्रेन के लिए फाइनैंशल बिड 2021 के अप्रैल तक पूरा हो जाना चाहिए। रिक्वेस्ट फॉर क्वॉलिफिकेशन को सितंबर 2020 तक फाइनल कर लिया जाएगा।