Parel workshop has built 110 engines for non-railway customers ...

रेलवे बोर्ड में यह मामला पहले ही विचाराधीन है कि रेलवे के कारखाने कॉर्पोरेट के हवाले कर दिए जाएँ। कारखानों में वर्कलोड की कमी तो है हि लेकिन उस पर भी ज्यादातर काम प्राइवेट के ठेकेदार ही कर रहे हैं। कारखानों को इस लायक भी नहीं बनाया गया कि बदलते समय के अनुसार विकसित तकनीक का उत्पादन किया जा सके। कर्मचारियों को भी विश्वस्तरीय ट्रेनिंग नहीं दी जा रही है।

रेलवे के सबसे पुराने कारखाने जो कि जमालपुर में स्थित है खस्ता हाल में है। 1890 तक कारखाना 50 एकड़ के दायरे में था। इसमें 3122 मजदूर कार्यरत थे। 1896-97 में जब ईस्ट इंडिया कंपनी का काम तेजी से फैला तो पहली बार विस्तारीकरण की गई। शेड विहीन शॉपों को शेड और आधुनिक मशीनों से लैस किया गया। धीरे-धीरे कारखाने का विस्तार होता गया और 1893 में प्रथम रेल फाउंड्री स्थापित की गई थी। 1899 से 1923 तक 216 वाष्प इंजन निर्माण, जमालपुर कारखाना में पहली बार उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रिक जैक, टिकट प्रिंटिंग, टिकट चॉपिंग, टिकट स्लाइडिंग और टिकट काउंटिंग की मशीन निर्माण किया गया था।

ढ़लाई द्वारा इस्पात के उत्पादन के लिए निर्मित 1/2 टन क्षमता वाली विधुत अर्क भट्टी का निर्माण 1961 में पहली बार हुआ था। प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में गोला बारूद सहित हथियारों का भी निर्माण यहाँ सुरक्षित किया गया था। यह कारखाना भारतीय रेल का अकेला क्रेन निर्माता है। 1960 में कम क्षमता वाली वाष्प क्रेन निर्माण शुरू किया, फिर 2 से 140 टन के 200 क्रेन बनाया। 1986 में जर्मनी की गोटवाल कंपनी को स्वदेशी तकनीक से हाइड्रोलिक क्रेन निर्माण कर आज भी देश व दुनिया को कुशलता का दम भरता है। इसके पहले  8 फरवरी 1862 ई. में कोलकाता बंदरगाह से 500 किलोमीटर दूर जमालपुर में रेल इंजन कारखाने की नींव डाली गई थी। इस दौरान सबसे पहले पटरियां बिछाकर और बरियाकोल सुरंग तैयार किया था। कारखाने में इंजन बनाने से लेकर मेंटेनेंस करने सहित अन्य कार्य शुरू किया गया था।

जमालपुर कारखाने की कई इकाईयां पहले ही बंद हो चुकी हैं पर दुर्भाग्य जमालपुर रेल इंजन कारखाना का पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रहा है। कारखाने के धीरे-धीरे कई इकाई बंद होने के बाद अब जमालपुर रेल कारखाना का एक महत्वपूर्ण शॉप डीजल शॉप बंद होने का प्रमाण भी आ ही गया। अप्रैल 2021 तक कोई भी वर्क लोड इस शॉप को नहीं मिलना, इस बात का संकेत संकेत है कि डीजल शॉप का अध्याय भी जमालपुर रेल कारखाना से समाप्त होने की ओर बढ़ चला है। बताते चलें कि एशिया प्रसिद्ध जमालपुर रेल इंजन कारखाना के डीजल शॉप हर महीने सात इंजन और साल में 84 इंजन का पीएच मरम्मत कार्य करता था। जिसमें लगभग 650 रेल कर्मी कार्यरत हैं। राइट के तीन इंजन का मरम्मत कर अपने उम्दा कारीगरी का प्रमाण दिया। अब डीजल शॉप बंद होने की दहलीज पर पहुंच गया है। हालांकि कोई भी अधिकारी इस बिदु पर मुंह खोलने से परहेज कर रहे हैं। वर्तमान में कारखाना प्रबंधन द्वारा कोई पहल नहीं किए जाने से रेल कर्मियों में आक्रोश व्याप्त है।

रेल कारखाना के विकास को लेकर वर्षों से संघर्षरत जमालपुर रेल इंजन कारखाना निर्माण इकाई संघर्ष मोर्चा के संयोजक सपा जिलाध्यक्ष पप्पू यादव ने कहा कि मोर्चा के लोग लगातार चिल्ला रहे हैं कि एक षड्यंत्र के तहत जमालपुर कारखाना को शिकार बनाया जा रहा है। उसी की एक कड़ी डीजल शॉप का समाप्त होना है। मोर्चा बार-बार यह कहती रही है कि भारतीय रेलवे विद्युतीकरण के बाद लौह नगरी जमालपुर में स्थापित डीजल शेड को इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रिक शॉप में तब्दील किया जाए। लेकिन, इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की गई। कारखाना के भविष्य को दांव पर लगाने में स्थानीय रेल अधिकारियों की भूमिका है। इसे जमालपुर की जनता कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।