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नई दिल्लीः केंद्र इस समय कठिन आर्थिक स्थिति से जूझ रहा है। केंद्र को मौजूदा वित्तीय वर्ष में कम से कम 7 से 10 लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त जुटाने हैं। इसके लिए उसे नए तरीके अपनाने होंगे। हालात ये हैं कि केंद्र के लिए मंत्रालयों, विभागों, निगमों, सार्वजनिक उपक्रमों, यहां तक कि बैंकों के लिए वेतन तथा हजारों सप्लायरों से ली गई सप्लाई के बिल अदा करने में परेशानी आ रही है।

इधर, सबसे बुरे हालात से गुजर रही रेलवे ने सरकार को ‘बचाओ-बचाओ’ संदेश भेजा है क्योंकि वह इस साल का पैंशन खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है तथा उसने वित्त मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है। रेलवे पर वित्तीय वर्ष 2020-21 में 53,000 करोड़ की पैंशन की देनदारी है और उसने कहा कि वित्त मंत्रालय इस साल उसकी यह जिम्मेदारी उठा ले। रेलवे में इस समय 13 लाख कर्मचारी तथा 15 लाख पैंशनर्स हैं तथा इनका वार्षिक खर्च 50,000 करोड़ से ज्यादा है। 

रेलवे के बड़े अधिकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय से रेलवे की बदहाल वित्तीय स्थिति तथा उन महत्वाकांक्षी योजनाओं पर विचार-विमर्श किया था जो अभी शुरू होने वाली हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय अन्य केंद्रीय मंत्रालयों से भी इसी तरह की बैठक करता है परंतु सबसे अधिक गंभीर हालात रेलवे तथा सड़क मंत्रालय के हैं। केंद्र अगले पांच सालों में रेलवे का कायाकल्प करने के लिए बड़ी योजना पर काम कर रहा है, ऐसे में रेलवे की मौजूदा वित्तीय बदहाली एक बड़ा झटका है। 

रेलवे ने 2024 तक नैशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन (एन.आई. पी.) योजना में 102 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना रखी है। सूत्रों के अनुसार प्रधानमंत्री कार्यालय को रेलवे के हालात से अवगत करा दिया गया है कि वह अपने फंड के लिए 53,000 करोड़ की राशि का बंदोबस्त नहीं कर सकती है। रेलवे के पैंशन फंड के क्लोजिंग बैंलेंस में 28,000 करोड़ रुपए की पहले से ही कमी दर्ज है। जाहिर है जब रेलवे पर इतनी देनदारियां हैं तो वह आंतरिक स्तर पर संसाधन कैसे जुटा पाएगी? इससे उसके अत्यंत जरूरी प्रोजैक्टों पर भी असर पडऩा तय है। बहरहाल, रेलवे केंद्र की ओर देख रही है।