Indian Railways, 1st January 2020 fare hike: see new ticket rates here

रेलवे में संवेदनशील पदों पर कार्यरत रेलकर्मियों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे बोर्ड ने मार्च 2021 तक इनके समयावधि तबादले पर रोक लगा दी है। इससे पूर्वोत्तर रेलवे में टीटीई, बुकिंग क्लर्क, ऑपरेटिंग, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल, सिग्नल एवं टेलीकॉम के हजारों रेलकर्मियों को राहत मिली है।
रेलवे में संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मियों का हर चार साल बाद रुटीन तबादला होता है।

इस वर्ष भी भारी संख्या में तबादले किए गए हैं। कोरोना संकट का हवाला देते हुए रेलवे के मान्यता प्राप्त संगठन एनएफआईआर और एआईआरएफ ने रेलवे बोर्ड के सामने यह मुद्दा उठाया था। जिसे संज्ञान में लेते हुए रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक, स्थापना डी. जोशफ ने सात अगस्त 2020 को सभी जोन के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर मार्च 2021 तक तबादले को स्थगित करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के आने के बाद पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ के महामंत्री विनोद कुमार राय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय संगठन एनएफआईआर को धन्यवाद दिया है।


महामंत्री ने कहा कि संघ ने लगातार पत्राचार करके तबादले पर रोक की मांग की थी। तबादले होने से रेलकर्मियों के बच्चों की पढ़ाई बाधित हो जाती, क्योंकि बच्चों का प्रवेश हो चुका है।
211 टीटीई का हुआ था तबादला
संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों का मुद्दा तब गरमाया, जब गोरखपुर जंक्शन पर कार्यरत 211 टीटीई का एक साथ तबादला कर दिया गया। अधिकारियों के दबाव में कुछ ने नई जगह पर ज्वाइन भी कर लिया। बाद में संगठन के दबाव में अधिकारियों ने बाकी लोगों को पूर्व की तैनाती पर ही काम करने दिया। अब सभी को इस फैसले से लाभ होगा।

चार साल बाद दो वर्ष मूल कैडर पर तैनाती का नियम
रेलवे में संवेदनशील पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को चार साल तक काम करने के बाद दो वर्ष का गैप होना चाहिए। इसके बाद ही संवेदनशील पद पर नियुक्त हो सकते हैं। दो वर्ष तक उन्हें मूल कैडर पर काम करना होगा। पीआरकेएस के महामंत्री एके सिंह ने कहा कि इसका पालन नहीं किया जा रहा है। इसका सख्ती से पालन किया जाए। वरना इससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा।