LIC launches pension plan, offers Rs 10,000/month for senior ...

7th Pay Commission news: नए आदेश में कहा गया है कि यदि मृतक कर्मचारी का परिवार डेथ सर्टिफिकेट और बैंक खाते की डिटेल दस्तावेज के साथ देता है और विभाग के मुखिया उससे सहमत है तो दावे को तुरंत मंजूरी दी जा सकेगी।

नौकरी के दौरान मृत्यु होने के मामलों में फैमिली पेंशन रिलीज करने के नियमों को केंद्र सरकार ने आसान कर दिया है। इस बदलाव के चलते सेवा के दौरान निधन होने की स्थिति में कर्मचारी के परिजनों को पेंशन मिलने में आसानी होगी और उन्हें महीनों चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। नागरिक सेवाओं के अलावा इससे सैन्य बलों के कर्मचारियों को भी बड़ी राहत मिलेगी, जहां ऐसे मामले ज्यादा आते हैं। डिपार्टमेंट ऑफ पेंशन ऐंड पेंशनर्स वेलफेयर की ओर से जारी किए गए आदेश के मुताबिक सेंट्रल सिविल सर्विसेज पेंशन रूल्स के नियम 80-A में ढील दी गई है। इस नियम के तहत फैमिली पेंशन और डेथ ग्रेच्युटी के लिए पे ऐंड अकाउंट्स ऑफिस की मंजूरी जरूरी होती थी। सभी दस्तावेजों के वेरिफिकेशन और फिर आदेश आने में कई बार महीनों लग जाते थे।

अब नए आदेश के मुताबिक जिस विभाग में कर्मचारी तैनात था, उसके हेड के आदेश के बाद ही पेंशन जारी की जा सकेगी। इसके लिए पे ऐंड अकाउंट्स ऑफिस के आदेश का इंतजार नहीं करना होगा। नए आदेश में कहा गया है कि यदि मृतक कर्मचारी का परिवार डेथ सर्टिफिकेट और बैंक खाते की डिटेल दस्तावेज के साथ देता है और विभाग के मुखिया उससे सहमत है तो दावे को तुरंत मंजूरी दी जा सकेगी। इससे तत्काल पीड़ित परिवार को प्रोविजनल पेंशन मिल सकेगी।

प्रोविजनल फैमिली पेंशन जारी करने के लिए विभागाध्यक्ष को पेंशन ऐंड अकाउंट्स ऑफिस को दस्तावेज आगे बढ़ाने औऱ मंजूरी मिलने का इंतजार नहीं करना होगा। यही नहीं सैन्य बलों के मामले में यदि कर्मचारी की मृत्यु नौकरी के दौरान हुई है तो फिर फाइनल ऑपरेशन कैजुअलिटी रिपोर्ट का इंतजार किए बगैर भी प्रोविजल फैमिली पेंशन शुरू की जा सकती है।

विभाग ने कहा कि दस्तावेजों को पे ऐंड अकाउंट्स ऑफिस तक भेजने और फिर मंजूरी मिलने में लंबी प्रक्रिया लगती थी। ऐसी स्थिति में मृतक कर्मचारी के परिजनों को महीनों चक्कर लगाने पड़ते थे। ऐसे में नए आदेश से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। यही नहीं आदेश में पे ऐंड अकाउंट्स ऑफिस को लेकर कहा गया है कि यदि विभाग के मुखिया ने प्रोविजन पेंशन को मंजूरी दे दी है तो फिर अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग पर पेमेंट नहीं रोकनी चाहिए।