Janata Curfew: For the first time in Indian Railways' history ...

रेलवे को यात्रियों से इस साल पिछले साल के मुकाबले 10 से 15 फीसदी ही रेवेन्यू मिल पाएगा. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने यह जानकारी दी है. कोरोना महामारी की वजह से यात्राओं पर तमाम तरह के अंकुश रेलवे के प्रदर्शन पर भारी पड़ने वाला है.

  • कोरोना संकट की वजह से ट्रेनों के संचालन पर अंकुश
  • अभी करीब 230 स्पेशल ट्रेने हीं चल रही हैं
  • इससे इस साल रेलवे को हो सकता है भारी नुकसान

कोरोना संकट की वजह से भारतीय रेलवे को इस वित्त वर्ष में पैसेंजर ट्रेनों से होने वाली आय (revenue) में 30 से 35 हजार करोड़ रुपये का भारी नुकसान हो सकता है. रेलवे को यात्रियों से इस साल पिछले साल के मुकाबले 10 से 15 फीसदी ही रेवेन्यू मिल पाएगा.

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन विनोद कुमार यादव ने यह जानकारी दी है. कोरोना महामारी की वजह से यात्राओं पर तमाम तरह के अंकुश रेलवे के प्रदर्शन पर भारी पड़ने वाला है.

गौरतलब है कि फिलहाल रेलवे सिर्फ 230 स्पेशल ट्रेनें चला रहा है, जिनमें कुल सीटों के मुकाबले करीब 75 फीसदी लोग ही यात्रा कर रहे हैं.

माल ढुलाई से भरपाई की होगी कोशिश

विनोद यादव ने बताया, ‘हम यह नहीं जानते कि कोरोना से बने हालात आगे किस तरह के होंगे. रेलवे का लक्ष्य साल 2020 में माल ढुलाई को 50 फीसदी तक बढ़ाना है. इसके लिए बुनियादी ढांचे का और विकास किया जाएगा और नीतियों को तर्कसंगत बनाया जाएगा.’

छंटनी न करने का दावा

रेलवे ने हाल में कहा था कि उसके कुछ कर्मचारियों के जॉब प्रोफाइल में बदलाव किया जा सकता है, लेकिन रेलवे ने इस पर जोर दिया है कि किसी की छंटनी नहीं की जाएगी. गौरतलब है कि हाल में ही रेलवे ने एक लेटर जारी कर अपने सभी जनरल मैनेजर्स से कहा था कि वे अपनी वैकेंसी में 50 फीसदी की कटौती करें और नए पोस्ट सृजित करना रोक दें.

इस पर रेलवे बोर्ड के महानिदेशक (HR) ने सफाई देते हुए कहा कि रेलवे सिर्फ कर्मचारियों के आकार को ‘सही रूप’ दे रहा है और उसमें कटौती नहीं की जा रही.

उन्होंने कहा कि रेलवे में कई तरह के तकनीकी विकास की वजह से कुछ जॉब प्रोफाइल में बदलाव किया जा सकता है, कई कर्मचारियों को नए तरह के कौशल की ट्रेनिंग दी जाएगी, लेकिन किसी की छंटनी नहीं होगी.