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रेलवे ने गार्ड व चालक को मिलने वाली लाइन बॉक्स की 165 साल पुरानी सुविधा को बंद करने का निर्णय लिया है। वहीं रेलवे यूनियनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। लाइन बॉक्स के बजाए रेलवे ड्राइवर/गार्ड को एक बैग देने की तैयारी कर रहा है। बैग को कंधे पर टांगकर सभी को ड्यूटी पर जाना होगा।

गार्ड व चालक को लोहे की मजबूत पेटी रेलवे की ओर से दी जाती रही है। यह सुविधा बीते 165 साल से जारी है। पेटी को ही लाइन बॉक्स कहते है। इसके अंदर हरी/लाल झंडी, टॉर्च के अलावा संरक्षा के नियमों की किताब रहती है। पेटी में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु जो रहती है, वह है डेटोनेटर की छड़ें। आपात स्थिति में इन छड़ों का उपयोग होता है। बैग में इन छड़ों के चोरी होने का डर है। इस वजह से ही गार्ड व चालक विरोध कर रहे है।

यह है विरोध का कारण

एनसीआरईएस के लोको रनिंग शाखा मंत्री हरिओम भारद्वाज का कहना है कि संरक्षा के लिए डेटोनेटर की छड़ दी जाती है। पेटी न होने पर इन छड़ को घर ले जाना होगा। अधिकांश घरों में छोटे बच्चे है। उनको या परिवार को ध्यान नहीं रहा या कोई हादसा हुआ तो जवाबदेह कौन रहेगा। इसके चलते ही विरोध किया जा रहा है। शुरू हो गया है।

किसी भी कीमत पर नहीं होने देंगे लागू

एनसीआरईएस के मंडल अध्यक्ष अक्षयकांत शर्मा का कहना है कि पेटी की जगह बैग के नियम को लागू नहीं होने देंगे। इसके लिए मंडल के उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। परिचालन विभाग के अधिकारी भी जानते हैं कि यह खतरनाक हो सकता है। ड्राइवर/गार्ड अथवा उनके परिवार को खतरे में नहीं डाला जा सकता।