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– रेलवे बोर्ड ने जुलाई में जारी किया है निर्देश – रेल परिचालन से जुड़े पदों पर नहीं रुकेगी कर्मचारियों की भर्ती भोपाल। नवदुनिया प्रतिनिधि अगले कुछ साल रेलवे में नौकरी भूल जाइए, क्योंकि रेलवे नॉन सेफ्टी श्रेणी के 50 फीसद पदों को सरेंडर करने जा रहा है। उन पदों को सरेंडर करने की तैयारी की जा रही है जो अभी खाली है। ऐसे कुल खाली पदों में से

– रेलवे बोर्ड ने जुलाई में जारी किया है निर्देश

– रेल परिचालन से जुड़े पदों पर नहीं रुकेगी कर्मचारियों की भर्ती

अगले कुछ साल रेलवे में नौकरी भूल जाइए, क्योंकि रेलवे नॉन सेफ्टी श्रेणी के 50 फीसद पदों को सरेंडर करने जा रहा है। उन पदों को सरेंडर करने की तैयारी की जा रही है जो अभी खाली है। ऐसे कुल खाली पदों में से 50 फीसद पदों को सरेंडर किया जाएगा। मतलब ये पद हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे, उन पर कभी भर्ती नहीं होगी। ट्रेनें चलाने वाले लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और गार्ड जैसे पद सरेंडर नहीं किए जाएंगे, क्योंकि ये सेफ्टी श्रेणी में आते हैं। इसके अलावा रेलवे में बाकी के जितने भी पद आते हैं यदि वे पद खाली हैं तो उनमें से 50 फीसद पद सरेंडर किए जाएंगे। रेलवे बोर्ड ने 2 जुलाई को इसके आदेश जारी किए हैं। रेलवे यूनियनों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है।

गहरे संकट में रेलवे दरअसल, रेलवे गहरे संकट से जूझ रहा है इसलिए रेलवे बोर्ड हर मामलों में फूक-फूंककर कदम रख रहा है। बोर्ड ने इसी महीने खाली पदों को न भरे जाने संबंधी गाइडलाइन जारी कर दी है। रेलवे बोर्ड के सूत्रों के मुताबिक रेलवे ने सभी जोन को पत्र भेजकर कहा है कि मंडलवार खाली पदों की सूची बना लें। उनमें से जो पद नॉन सेफ्टी श्रेणी के हैं उनमें से कुछ पद ही भरें, बाकी की सूचना बोर्ड को दें। अब रेलवे के अधिकारी इस पर जुट गए हैं। भोपाल समेत सभी मंडलों में खाली पदों को खंगाला जा रहा है। हालांकि रेलवे बोर्ड के अधिकारी नाम न छापने की शर्त पर कह रहे हैं कि उक्त गाइडलाइन का मतलब यह नहीं है कि नहीं भरे जाने वाले पदों को हमेशा के लिए सरेंडर किया जाएगा, बल्कि उन पदों को आर्थिक संकट के चलते कुछ सालों के लिए नहीं भरा जाएगा। जैसे ही स्थिति सुधरेगी, तब पुनः भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस मामले में रेलवे के जानकारों का कहना है कि एक बार कोई पद सरेंडर कर दिया जाए, तो उस पर दोबारा भर्ती करना बहुत मुश्किल है। इस तरह यह कहना आसान है कि सरेंडर पदों को दोबारा सक्रिय कर लिया जाएगा।

नॉन सेफ्टी श्रेणीः इसमें रेलवे का वाणिज्य, इंजीनियरिंग, एकाउंट, पर्सनल जैसे विभगों में काम करने वाले लगभग सभी अधिकारी कर्मचारी आते हैं। इन केटेगरी के पद सरेंडर होने से कर्मचारियों के प्रमोशन पर असर पड़ेगा और कर्मचारियों को सालों तक एक ही ग्रेड पे में रहना पड़ेगा।

सेफ्टी श्रेणः इसमें ट्रेन चलाने वाले लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, पीछे डिब्बे में रहने वाले गार्ड और ऑपरेटिंग कंटोल में कार्यरत कंट्रोलर आदि आते हैं।

रेलवे की मजबूरी अभी इक्का-दुक्का को छोड़कर ट्रेनें चल नही रही है। आगे ट्रेनें कब तक पटरी पर लौटेंगी यह कहना मुश्किल है। यदि ट्रेने पटरी पर नहीं लौटी तो रेलवे को जिस तरह बीते छह महीने से आवक नहीं हो रही है। वह आगे भी नहीं होगी और एक समय ऐसा आएगा कि रेलवे के लिए कर्मचारियों को वेतन देना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा। ये सभी बातें रेलवे को दिनो-दिन चिंता में डाल रही हैं इसलिए रेलवे हर तरह की कटौती कर रहा है।

यूनियनों का तर्क-जब कर्मचारियों की जरूरत नहीं तो निजीकरण क्यों 16 जुलाई को रेलमंत्री पीयूष गोयल ने रेल यूनियनों के नेताओं से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बात की थी। इस बातचीत के दौरान ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने पदों को सरेंडर करने पर गहरी आपत्ति जताई है। बाकी यूनियनों ने भी विरोध दर्ज कराया है। वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्प्लाइज यूनियन के अध्यक्ष रवि जायसवाल ने कहा कि तीनों मंडलों में इस आदेश का विरोध कर रहे हैं। आगे भी करेंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे एक तरफ पद सरेंडर कर रहा है और दूसरी तरफ रेलवे का निजीकरण करने पर तुला है। यह ठीक नहीं है। जब रेलवे का निजीकरण किया जा रहा है इसका मतलब रेलवे में लोगों की जरूरत है तो फिर खाली में से 50 फीसद पदों को सरेंडर क्यों किया जा रहा है। जबकि कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में रेलवे और उसके कर्मचारियों ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वहीं निजी क्षेत्रों का उदाहरण सबके सामने हैं। निजीकरण बर्बाद कर देगा। अब आम आदमी को भी इस बारे में चिंता होने लगी है। रेलवे अपने निर्णय पर पुनः विचार करें।