CCTVs at reservation centres to check tickets' black-marketing ...

कोरोना काल की महामारी के दौर में पश्चिम मध्य रेलवे में मिशन इनकम तेज हो गया है, जिसमें सबसे पहले जबलपुर रेल मंडल के वाणिज्य विभाग के स्टाफ को मल्टी स्किल्ड बनाने की तैयारी की जा रही है, वहीं राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से स्टाफ को बाजार में टीमें बनाकर व्यापारियों से मुलाकात कर ऑर्डर हासिल करने को कहा गया है। जिसके बाद पिछले दो दिनों से कॉमर्शियल स्टाफ की टीमें दिन भर बाजार में भटकने के लिए मजबूर हैं।

कॉमर्शियल स्टाफ का कहना है कि रेल प्रबंधन राजस्व हासिल करने के लिए उन्हें कोरोना के संक्रमण के दौर में बाजार भेज कर दुकान-दुकान जाने के लिए मजबूर कर रहा है लेकिन मंडल में ऐसे कई विभाग हैं, जिनके स्टाफ के पास कोई काम नहीं है लेकिन उनसे कोई काम नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रेल प्रशासन कॉमर्शियल विभाग के कर्मचारियों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार कर रहा है।

रेलवे से मिली जानकारी के अनुसार कोरोना की वजह से भारतीय रेल की अधिकांश ट्रेनें कई महीनों से बंद हैं, ऐसे में रेल टिकट की बिक्री बंद होने, माल भाड़े की बुकिंग नहीं होने के कारण रेलवे को राजस्व की भारी हानि हो रही है लेकिन काम के अभाव में बैठे रेलवे स्टाफ को हर महीने वेतन देने का बोझ रेलवे पर है। ऐसे में राजस्व की प्राप्ति के लिए पमरे में मिशन इनकम चलाया जा रहा है, जिसमें मंडल के 113 कर्मचारी जिनमें जबलपुर के 38 कर्मी शामिल हैं, को बाजार में भेजकर उन्हें दुकानदारों से माल की बुकिंग के लिए सर्वे करने कहा गया है।

यह सर्वे 22 जुलाई तक चलेगा, जिसमें कॉमर्शियल स्टाफ द्वारा व्यापारियों से माल कहाँ से मँगवाते हैं, कहाँ भेजते हैं, कितने रेट पर मिलता है, बुकिंग करने पर ट्रांसपोर्ट वाले क्या भाड़ा लेते हैं आदि जानकारियाँ ली जा रही हैं।

बताया जा रहा है कि व्यापारियों ने सर्वे के दौरान यह बात कही है कि ट्रांसपोर्टर उनके गोदामों पर माल लादने और छोड़ने की सुविधा प्रदान करते हैं लेकिन रेलवे में बुकिंग करने पर वैगन में क्या माल लदवाने की सुविधा मिलेगी, यह जरूरी प्रश्न है। यदि रेलवे माल लादने और सुरक्षा के उपाय करती है तो व्यापारी रेलवे की ओर आकर्षित होंगे। माना जा रहा है कि 22 जुलाई के बाद रेल मंडल की बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी।