AIR Worldwide Estimates COVID-19 Global Deaths Could Rise 10K-30K ...

कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। मरने वालों में भी इजाफा हो रहा है। इन सभी के बीच राज्य के कई कंटेनमेंट जोन में लॉकडाउन लगाया गया है। आगे की स्थिति क्या होगी, इस पर 31 जुलाई के बाद ही राज्य सरकार फैसला लेने वाली है। फिलहाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सरकारी कर्मचारियों को लेकर कहा है कि 31 जुलाई तक आधे कर्मचारी ही काम पर आएंगे जिनकी संख्या अब तक 70 प्रतिशत थी। लॉकडाउन को लेकर मुख्यमंत्री ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि वह समझदारी से काम लें और बेवजह घर से बाहर निकल कर इधर-उधर ना घूमे। घर में रहने का मतलब यह नहीं है कि वह ऑफिस ना जाकर घूमने जाएं।

सरकारी निजी कार्यालय वर्क फ्रॉम होम कराये
मुख्यमंत्री ने सभी सरकारी और निजी ऑफिस से अपील की है कि वे ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों से सहूलियत के अनुसार वर्क फ्रॉम होम करवाए। यह वक्त सावधानी बरतने का है इसलिए इस पर सभी ध्यान दें। मुख्यमंत्री ने कोरोना को लेकर सावधानी बरतने के लिए सभी सरकारी कार्यालयों का हर सप्ताह सैनिटाइजेशन करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना का संक्रमण का सबसे अधिक खतरा इन दिनों आवासनों में देखा जा रहा है, इसलिए वहां की सोसाइटी इसे लेकर थोड़ी गंभीरता से विचार करें और सैनिटाइजेशन की पूरी व्यवस्था करें। खासकर के बाहर से आने वाले सामानों को बगैर सैनिटाइज किए भीतर न जाने दें तभी किसी न किसी तरीके से संक्रमण पर वहां रोक लगाई जा सकती है।

सरकार भगवान नहीं, समय दें, सब व्यवस्था होगी
कोरोना को लेकर राज्य सरकार के तमाम दावे गलत हैं, उनके द्वारा किए जा रहे कार्य नाकाफी हैं, ऐसे कई आरोपों पर भड़की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि सरकार भगवान या मैजिशियन नहीं होती। उन्हें भी वक्त लगता है सब कुछ पटरी पर लाने के लिए। पिछले मार्च महीने से अब तक राज्य सरकार कोरोना को लेकर हर संभव कोशिश कर रही है। अस्पतालों में लगातार इलाज कराया जा रहा है। विरोधी पार्टियों के नेता ऐसे समय में सहायता न कर आरोप लगाने में लगे हुए हैं। मुझे तो उम्मीद थी कि केंद्र की तरफ से इस समय में कुछ नहीं तो 10000 वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, पीपीई किट मिलेगा, मगर जो मिला वह खाली हाथ के बराबर रहा। सरकार खाली हाथ ही सब कुछ करती आई है, जो लोग बंगाल पर उंगली उठा रहे हैं वह देश विदेशों में जाकर स्थिति देखें। बहुत दूर नहीं गुजरात, दिल्ली के अस्पतालों को जाकर देखें वहां की स्थिति क्या है। उनकी तुलना में बंगाल काफी बेहतर स्थिति में है। यहां के सरकारी अस्पतालों का पूरी तरह से कायापलट पिछले 9 सालों में कर दिया गया है। रोगी यहां निश्चिंत होकर आते हैं क्योंकि उन्हें यहां चिकित्सा की पूरी व्यवस्था दी जाती है।

पाड़ा इलाके से भी नहीं मिल रही मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें कोरोना के लिए एक कम्युनिटी सेंटर तक नहीं मिल रहा है। जहां भी टीम जाती है वहां लोग कहते हैं कि यहां कोरोना से सम्बंधित कोई व्यवस्था न करें। ऐसी स्थिति में सरकार करे तो क्या करें। हमें भी समय चाहिए ताकि लोगों तक सारी व्यवस्था दी जा सके। शवदाह को लेकर भड़कीं ममता ने कहा कि कोरोना से मरे लोगों का शव दाह धापा में किया जा रहा है। अपने इलाके में कोई इन लोगों का शवदाह तक नहीं करने दे रहे हैं। लोगों में न जाने क्या आतंक है। धापा में जो व्यवस्था है वह पर्याप्त नहीं है इसलिए वहां व्यवस्था और सुदृढ़ करने के लिए कहा गया है। जल्द वहां चूल्ही बनाने का प्रस्ताव दिया गया है मगर उसमें समय लगेगा। जो लोग सरकार के कामों पर उंगली उठा रहे हैं उन्हें पैसे में दे रही हूं वह 7 दिन के भीतर पूरी तैयार करके दें।