What is Gratuity and How to Calculate It? - Aman Khana - Medium

नौकरी करने वाले लोगों को केंद्र सरकार ग्रेच्युटी नियमों में बदलाव का ऐलान कर सकती है. सरकार की तैयारी है कि अब जितने दिन काम उतने दिन की ग्रेच्युटी मिलेगी. सरकार के इस फैसले के बाद करोड़ों कमर्चारियों को राहत मिलेगी.

देशभर के नौकरीपेशा लोगों के लिए केंद्र सरकार (Government of India) एक बड़ा ऐलान कर सकती है. दरअसल, केंद्र सरकार इस तैयारी में है कि ग्रेच्युटी (Gratuity Rules Change Soon) के लिए 5 साल की शर्त को खत्म कर 1 साल कर दिया है. इसके अलावा फिक्स्ड टर्म पर काम करने वालों को भी ग्रेच्युटी देने का प्रावधान लाया जा सकता है. इस बदलाव के बाद ग्रेच्युटी के लिए किसी कंपनी में 5 साल काम करना जरूरी नहीं होगा. सरकार की तैयारी है कि अब जितने दिन काम उतने दिन की ग्रेच्युटी मिलेगी.

फिक्स्ड टर्म वालों को भी ग्रेच्युटी का फायदा मिलेगा. हालांकि अभी यह तय नहीं है कि केंद्र सरकार अब इसके ऐलान में कितना समय लेगी. लेकिन, सरकार के इस फैसले के बाद करोड़ों कमर्चारियों को राहत मिलेगी.

क्या है ग्रेच्युटी को लेकर सरकार की तैयारी
>> सूत्रों के मुताबिक नौकरी बदलने पर ग्रेच्युटी ट्रांसफर का विकल्प मिलेगा. सरकार ग्रैच्युटी के मौजूदा स्ट्रक्चर में बदलाव की तैयारी कर रही है.

>> पीएफ की तरह हर महीने ग्रैच्युटी कॉन्ट्रिब्यूशन का प्रस्ताव दिया गया है. ग्रैच्युटी को भी वैध रूप से CTC का हिस्सा बनाने का प्रस्ताव है.

>> सूत्रों के मुताबिक लेबर मिनिस्ट्री ने प्रस्ताव पर काम शुरू कर दिया है. एम्प्लॉयर एसोसिएशन के साथ बैठक में चर्चा हो चुकी है.

>> PF ट्रस्ट के तहत ग्रैच्युटी को भी लाने पर विचार हो रहा है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि ग्रैच्युटी मिलने का न्यूनतम समय एक साल तय होगा.

>> अभी सिर्फ अस्थाई कर्मचारियों के लिए एक साल की घोषणा की गई है. टैक्स लाभ नए स्ट्रक्चर से कंपनियों को मिल सकता है. मासिक कॉन्ट्रिब्यूशन से कंपनियों को एक मुश्त रकम देने की जरूरत नहीं होगी.

क्या होती है ग्रेच्युटी?
आसान भाषा में समझें तो किसी कंपनी में लगातार कई सालों तक काम करने वाले कर्मचारी को सैलरी, पेंशन और प्रोविडेंट फंड (PF- Provident Fund) के अलावा जो पैसा मिलता है, उसे ग्रेच्युटी कहते हैं. इसका एक छोटा सा हिस्सा कर्मचारी की सैलरी से कटता है, लेकिन ग्रेच्युटी का बड़ा हिस्सा कंपनी अपनी तरफ से देती है. यह एक तरह से कंपनी का लॉन्ग टर्म बेनिफिट की तरह होता है.

कौन करता है ग्रेच्युटी का भुगतान?
किसी भी कंपनी में एक तय समय तक काम करने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी दी जाती है. मौजूदा नियमों के मुताबिक, ग्रेच्युटी का हकदार होने के लिए कर्मचारी को कम से कम 5 साल तक एक ही कंपनी में काम करना होता है. मीडिया रिपोर्ट्स में इसी समय सीमा को 5 साल से घटाकर 1 साल करने की बात हो रही है. ग्रेच्युटी एक्ट के मुताबिक, जिस कंपनी में 10 या उससे अधिक कर्मचारी होते हैं, उस कंपनी के कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का लाभ मिलता है. ग्रेच्युटी का भुगतान कंपनी ही करती है.

मौजूदा नियमों के मुताबिक कैसे कैलकुलेट की जाती है ग्रेच्युटी?
ग्रेच्युटी की गणित थोड़ी जटिल होती है. लेकिन, चिंता न करें. हम आपको इसे भी आसान भाषा में समझाते हैं. मान लीजिए कि किसी कर्मचारी ने 30 साल तक एक ही कंपनी में काम किया. कर्मचारी की आखिरी सैलरी में बेसिक और महंगाई भत्ता (Basic Salary + Dearness Allowances) मिलाकर कुल 50 हजार रुपये बनता है. एक बात आपको जाननी जरूरी है कि ग्रेच्युटी का हिसाब एक महीने में 30 दिन के बजाए 26 दिन के आधार पर होता है. क्योंकि बाकी के चार दिन छुट्टी के तौर पर माना जाता है.

अब इस 50 हजार रुपये को 26 से भाग देंगे. भाग के बाद जो रकम निकलेगी, वो 1923.07 रुपये होगी. अब कर्मचारी की सर्विस के कुल सालों को 15 से गुणा करेंगे. दरअसल, एक साल में 15 दिन के आधार पर ग्रेच्युटी कैलकुलेट की जाती है. ऐसे में 30 साल से 15 से गुणा करेंगे तो रिजल्ट 450 आएगा. अब इस 450 को 1923.07 से गुणा करेंगे. इस गुणा के बाद कुल रकम 8,65,381 होगी. इस प्रकार 30 साल तक किसी कर्मचारी के काम करने पर उसके बेसिक सैलरी व महंगाई भत्ते के आधार कुल 8 लाख 65 हजार 381 रुपये की ग्रेच्युटी मिलेगी.