Janata Curfew: For the first time in Indian Railways' history ...

कोरोना संक्रमण के चलते मार्च से बंद की गई ट्रेनों के कारण रेलवे कर्मचारियों को मुफ्त यात्रा के लिए मिलने वाले पास-पीटीओ बेकार हो गए। कर्मचारी संगठनों ने रेलवे बोर्ड से इन्हें उपयोग में लाए जाने के लिए समाधान निकलने के लिए कहा तो बोर्ड ने संगठनों को राजी करने के लिए पास-पीटीओ की मान्यता अवधि को जारी करने के तिथि के अनुसार अलग अलग अवधि तक बढ़ाने के निर्देश दे दिए। रेलवे के दोनों फेडरेशन ने अपनी उपलब्धि बताकर कर्मचारियों के बीच जोर-शोर से प्रसारित भी कर दिया लेकिन अधिकांश रूट पर ट्रेनें नहीं संचालित होने के कारण कर्मचारी इनका उपयोग नहीं कर सके।

दरअसल, हाल ही रेलवे बोर्ड के उप निदेशक (स्थापना) वी मुरलीधरन ने अभी जोनल रेलवेज को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि पिछले साल जारी किए गए पास-पीटीओ, जो कि कोरोनाकाल में उपयोग में नहीं लिए जा सके, उनकी अवधि को बढ़ाया जाए। जो पिछले साल 23 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच जारी किए गए थे, वे 15 जुलाई तक मान्य होंगे। इसी तरह जो 1 से 30 दिसंबर तक जारी किए हैं, वे 15 अगस्त तक और जो पिछले साल के अंत में जारी किए गए हैं, वे 31 अगस्त तक उपयोग में लिए जा सकेंगे।

वहीं इस साल 1 से 31 के बीच जारी किए गए पास-पीटीओ 15 सितंबर, 1 से 29 फरवरी के 15 अक्टूबर और 1 से 31 मार्च के बीच जारी हुए 15 नवंबर तक मान्य होंगे। यह लाभ सेवारत और सेवानिवृत दोनों कर्मचारियों और उनके आश्रितों को मिलेगा।

रूट की बाध्यता के चलते उपयोग मुश्किल
रेलवे ने पास-पीटीओ की अवधि तो बढ़ा दी, लेकिन रूट की बाध्यता के चलते अधिकांश कर्मचारी इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। दरअसल रेलवे द्वारा पास-पीटीओ जारी करते समय यात्रा करने का एक निश्चित रूट पूछा जाता है। उसके अलावा दूसरे रूट पर यात्रा नहीं की का सकती है।

जयपुर से जारी हुए 70 फीसदी पास-पीटीओ यूपी, बिहार रूट के हैं। ट्रेनें नहीं संचालित होने के कारण ये पास-पीटीओ अभी भी कर्मचारियों के लिए बेकार ही हैं। ऐसे में अगर रेलवे रूट की बाध्यता को खत्म करता है, तो ही कर्मचारियों और अधिकारियों को इसका वास्तविक लाभ मिल सकेगा।