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केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी पर एक साल के लिए रोक वाली खबर को पीआईबी फैक्ट चेक ने फेक न्यूज बताया है. कोरोनावायरस संक्रमण और लॉकडाउन के बीच केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी इस साल नहीं की जायेगी, ऐसी खबरें 15 जून को कई मीडिया हाउस ने प्रमुखता से प्रकाशित की गयी. मंगलवार को पीआईबी ने इस खबर का खंडन किया है और कहा है कि यह खबर फेक है.

पीआईबी फैक्ट चेक ने ट्वीट किया, ‘दावा : डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (DoPT) का हवाला देते हुए मीडिया रिपोर्ट का दावा, केंद्र सरकार ने अगले साल तक वेतन वृद्धि को स्थगित किया.’ वहीं पीआईबी ने ट्वीट किया, ‘Fact Check : आदेश एनुअल परफॉर्मेंस एसेसमेंट रिपोर्ट (एपीएआर) पूरा करने और समयसीमा विस्तार से संबंधित है, वेतन वृद्धि से नहीं. रिपोर्ट में गलत तथ्यों की व्याख्या की गयी है.

आपको बता दें कि सोमवार को विभिन्न न्यूज पोर्टलों पर एक खबर प्रमुखता से प्रकाशित की गयी थी, जिसमें कहा गया कि डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल ट्रेनिंग (DoPT) ने एक ऑर्डर जारी किया है. इस ऑर्डर के अनुसार केंद्रीय कर्मचारियों के एनुअल परफॉर्मेंस एसेसमेंट रिपार्ट (APAR) को पूरा करने की समय सीमा बढ़ा दी गयी है. इसे बढ़ाकर मार्च 2021 तक कर दिया गया है. यानि कर्मचारियों को 2020 में इंक्रीमेंट नहीं मिलेगा.

खबर के अनुसार नये आदेश को समझें तो एपीएआर की म‍ियाद बढ़ाकर अगले साल मार्च 2021 तक कर दी गयी है. यानी इससे पहले वेतन में बढ़ोत्‍तरी नहीं होगी. ये आदेश 11 जून को जारी किया गया था. खबर में कहा गया कि केंद्र सरकार के इस फैसले का असर ग्रुप ए, बी और सी के अधिकारियों पर पड़ेगा. इसमें यह भी जिक्र किया गया है कि इसी साल अप्रैल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) की बढ़ोतरी को टाल दिया गया था.

पीआईबी फैक्ट चेक मीडिया में चल रही खबरों को लेकर फैक्ट चेक करता है. सरकार और सरकारी आदेशों से जुड़े खबरों पर पीआईबी का यह सेल रिसर्च करता और खबर की सत्यता की पुष्टि करता है. पीआईबी की ओर से सोशल मीडिया पर वायरस फेक मैसेज का फैक्ट चेक भी जारी किया जाता है, जिसमें बताया जाता है कि कौन सी सूचना सही है और कौन सी गलत.