Reservation In Promotion – A perspective

हाइलाइट्स

  • सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसले में कहा था आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है
  • बीजेपी अध्‍यक्ष बोले- मोदी सरकार वंचित तबके को आरक्षण की सुविधा देने के लिए प्रतिबद्ध
  • सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने किया आवेदन, प्रमोशन में आरक्षण पर मांगा स्‍पष्‍टीकरण
  • कहा- जनवरी से रुके हैं 1.3 लाख प्रमोशन, ठप है 78 में से 23 विभागों का काम

आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्‍पणी के बाद केंद्र सरकार ने फूंक-फूंक कर कदम उठाने शुरू किए हैं। फिलहाल केंद्र सरकार ने अस्‍थायी तौर पर कर्मचारियों को प्रमोशन देने की इजाजत मांगी है। सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल कर केंद्र ने कहा कि बड़ी संख्‍या में पद खाली पड़े हैं। जनवरी, 2020 तक लगभग 1.3 प्रमोशन पेंडिंग थे। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से प्रमोशन में आरक्षण के मामले पर स्‍पष्‍टीकरण मांगा है। SC ने पिछले साल 15 अप्रैल को यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया था। केंद्र सरकार ने अपने आवेदन में कहा है कि तब से प्रमोशन अटके होने से कर्मचारी-अधिकारी नाखुश हैं। अदालत को यह भी बताया गया कि 78 में से 23 विभागों में प्रमोशन पेंडिंग हैं।

केंद्र सरकार के आगे है बड़ी परेशानी
सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा है कि उसके आदेश की वजह से हर तरह के प्रमोशन रुक गए। बिना प्रमोशन पाए ही हर महीने कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं, इससे नाराजगी है। केंद्र ने कहा कि कोरोना वायरस जैसी महामारी के वक्‍त सरकारी कर्मचारियों का मनोबल ऊंचा रहना चाहिए। प्रमोशन न मिलने से वे डिसकरेज हो रहे हैं। केंद्र ने नजीर भी सामने रखी है कि 17 मई 2018 और 5 जून 2018 को ऐसे ही आवदेनों पर अदालत ने प्रमोशन की अनुमति दे दी थी।

आरक्षण मूल अधिकार नहीं है : सुप्रीम कोर्ट
आरक्षण को लेकर एक नई बहस सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्‍पणी से शुरू हुई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के मेडिकल कॉलेजों में ओबीसी कोटा को लेकर दाखिल याचिकाओं की सुनवाई करते हुए कहा था कि आरक्षण मौलिक अधिकार नहीं है। यह याचिका तमिलनाडु की कई पार्टियों ने दाखिल की थी। याचिका में मेडिकल कॉलेजों में 50 फीसदी सीटें ओबीसी के लिए रिजर्व करने की मांग की गई थी। इसके बाद फौरन केंद्र में सत्‍तारूढ़ बीजेपी ने अपना स्‍टैंड साफ कर दिया।

आरक्षण को चुनौती से बचाने के लिए पहल की अपील
केंद्र सरकार में बीजेपी की सहयोगी पार्टी लोजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने मांग की कि इस मामले में सभी दलों को साथ आना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि आरक्षण से जुड़े सभी कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में डाल देना चाहिए ताकि कानूनी चुनौती से बचा जा सके। पासवान ने कहा कि संविधान के मुताबिक अनुसूचित जाति/जनजाति पहले से ही पिछड़ा है। संविधान में प्रदत्त अधिकारों के तहत न सिर्फ अनुसूचित जाति/जनजाति बल्कि अन्य पिछड़े वर्ग और ऊंची जाति के गरीब लोगों को भी आरक्षण दिया गया है।