रेलवे के वित्त विभाग ने कोविड लॉकडाउन के दौरान संकट का सामना किया है, मई में श्रमिक परिचालन शुरू होने तक यात्री ट्रेनों को पूरी तरह से रोक दिया गया था.

हजारों सेवानिवृत्त भारतीय रेलवे के कर्मचारियों को जिन्हें पिछले साल फिर से काम पर रखा गए था, वे अपनी नौकरी से निकाले जा सकते हैं, क्योंकि रेलवे ने लॉकडाउन की मार को कम करने के लिए अपने खर्चों में कटौती करना चाहता है, दिप्रिंट को यह जानकारी मिली है.

हालांकि, यह कदम अन्य कारण से भी प्रेरित है, जैसे कि सेवानिवृत्त लोगों की बढ़ती उम्र के हिसाब से कोविड-19 से खतरा भी है. रेलवे में उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा कि इन नौकरियों में कटौती से ट्रांसपोर्टर को वेतन बिलों में करोड़ों की बचत होगी.

इनमें अधिकांश जूनियर कर्मचारी शामिल हैं, जो ट्रैक मशीन, पुल और इसी तरह की तकनीकी सुरक्षा श्रेणियों के संचालन में शामिल हैं. वे पेंशन के हकदार हैं, जो कि उन्हें मिलने वाली सैलरी का 50 फीसदी है.

भारतीय रेलवे की ख़राब वित्त व्यवस्था ने लॉकडाउन में एक और परेशानी का सामना किया है. लॉकडाउन की वजह से भारतीय यात्री ट्रेनों को पूरी तरह से रोक दिया था – जो अपने आप में एक अभूतपूर्व घटना थी – जब तक कि श्रमिक एक्सप्रेस परिचालन मई में शुरू नहीं किया गया था. महामारी के खतरे अभी भी है, पूर्ण-संचालन को फिर से शुरू करना अभी बाकी है.

सूत्रों के मुताबिक, जोनल रेलवे महामारी के कारण कम समय में पैसा बचाने के लिए तत्काल प्रभाव से फिर से लगे कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त करने की मांग कर रहा है.

दक्षिणी रेलवे और दक्षिणी पूर्वी रेलवे जैसे कुछ क्षेत्रों ने पहले ही मई में कर्मचारियों की सेवाओं को समाप्त कर दिया था.

5 मई को लिखे पत्र में दक्षिणी रेलवे ने कहा, ‘लॉकडाउन के कारण आंशिक उपस्थिति को देखते हुए और 60 साल से ऊपर के लोगों में कोविड-19 का अधिक जोखिम होने के कारण यह तय किया गया है कि दिए गए विवरण के अनुसार दक्षिणी रेलवे की सभी कार्यशालाओं के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सभी सेवाओं को समाप्त करने के लिए विधिवत रूप से 15 दिनों के नोटिस दिए गए हैं.’

जब इस मामले पर आधिकारिक टिप्पणी के लिए संपर्क किया गया तो केंद्रीय रेल मंत्रालय के प्रवक्ता डी जे नारायण ने कहा कि उन्हें इस तरह के किसी भी घटनाक्रम की जानकारी नहीं है.

इतने सारे कर्मचारी फिर से काम में क्यों लगाए गए?

2019 में रेलवे बोर्ड ने एक योजना को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य दो साल के लिए हजारों रिक्तियों को अनुबंधित और ‘प्रयोगात्मक आधार’ पर भरने के लिए अपने रिटायर पूल का दोहन करना था. यह योजना वेतन ग्रेड स्तर 1 से 7 में सीधी भर्ती कोटा के लिए ‘स्पष्ट रिक्तियों के खिलाफ’ की अनुमति देने के लिए थी, जिसका अर्थ है कि अधिकांश जूनियर- स्तरों पर भर्ती करना था.

आदेश में कहा गया था, ‘जैसे ही रिक्तियों को ताजा भर्ती या अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति सहित अन्य मोड से भरा जाता है, इस चैनल के माध्यम से किए गए संविदात्मक नियुक्तियों को कम किया जायेगा.’

बाद में हजारों सेवानिवृत्त लोगों को ‘ट्रैक मशीनों, पुल और अन्य समान तकनीकी सुरक्षा श्रेणियों में रखा गया.’

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘भारतीय रेलवे में हजारों पुन: लगे हुए कर्मचारी हैं. कर्मचारियों की कमी के कारण उन्हें फिर से लगाया गया है. अकेले उत्तर रेलवे में, लगभग 1,000 पुन: लगे हुए कर्मचारी हैं.

उन्हें हटाने के निर्णय के बारे में बात करते हुए, अधिकारी ने कहा कि ‘लॉकडाउन के दौरान अतिरिक्त श्रमशक्ति थी और रेलवे अपनी श्रमशक्ति का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम नहीं था.’

अधिकारी ने कहा, ‘जो फिर से लगे हुए हैं वे 60 से अधिक आयु वर्ग में हैं और कोविड -19 के लिए बहुत कमजोर हैं, यह महसूस किया जाता है कि उनकी सेवाओं को समाप्त करना एक विवेकपूर्ण कार्य होगा.  इसके अलावा, ऐसा करने से प्रति माह सरकारी खजाने को सैकड़ों करोड़ की बचत होगी.’

पुनः नियुक्ति नीति की उत्पत्ति पर चर्चा करते हुए एक दूसरे वरिष्ठ रेलवे अधिकारी ने कहा कि भारत सरकार द्वारा भर्ती कम है, यही वजह है कि रेलवे- एक अत्यंत जनशक्ति पर निर्भर इकाई- को सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर निर्भर होना पड़ा.

रेलवे में कार्य बहुत विशिष्ट हैं … इसलिए कम भर्ती की स्थिति में सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर निर्भरता है … लेकिन हां, निश्चित रूप से यह एक अतिरिक्त वित्तीय बोझ है. उनकी सेवाओं की समाप्ति के बाद, फिर से लगे कर्मचारियों को उनकी पेंशन का भुगतान किया जाएगा.

ट्रांसपोर्टर का वित्तीय संकट और बढ़ गया

कोविड-19 महामारी के दौरान लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने ट्रांसपोर्टर के वित्तीय संकट को बढ़ा दिया है, जिसका वेतन और पेंशन बिल कथित तौर पर सभी लागतों के दो-तिहाई तक बढ़ गया है.

इस साल जनवरी में, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने केंद्रीय वित्त मंत्रालय को रेलवे कर्मचारियों के लिए पेंशन फंड बनाने के लिए कहा था, जिसमें कहा गया था कि इसकी कमाई का 25 प्रतिशत हिस्सा 50,000 करोड़ रुपये के पेंशन भुगतान में जाता है.

यादव ने यह भी कहा कि रेलवे की कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने 12.5 लाख कर्मचारियों को वेतन देने पर खर्च करता है.

2019-20 में रेलवे का परिचालन अनुपात 98.44 प्रतिशत था, जिसका अर्थ है कि रेलवे इस दौरान 100 पैसे (एक रुपये) कमाने के लिए 98.44 पैसे खर्च कर रहा था.

पिछले तीन महीनों में यात्री ट्रेनों से राजस्व न के बराबर है, और माल ढुलाई वाली ट्रेनें भी संकट का सामना कर रही हैं और परिचालन अनुपात और भी अधिक बढ़ना तय है.