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कोरोना महामारी ने रेलवे के सामने भी संकट खड़ा कर दिया है। रेलवे अब कर्मचारियों की छंटनी करने जा रहा है। इलाहाबाद रेल मंडल ने अलीगढ़ जंक्शन के ऑपरेटिंग विभाग के ऐसे कर्मचारियों की सूची मांगी है, जो 55 साल से अधिक उम्र के हैं या फिर सेवानिवृत्त होने के बाद भी मानदेय पर सेवा दे रहे हैं। यह सूची लॉकडाउन के दौरान दूसरी बार मांगी गई है।

अलीगढ़ जंक्शन के अधीक्षक डीके गौतम ने बताया कि जंक्शन के ऑपरेटिंग विभाग के 10 ऐसे कर्मचारियों की सूची भेजी गई है। नौ कर्मचारी 55 साल से अधिक उम्र वाले हैं। साथ ही एक अन्य कर्मचारी सेवानिवृत्त होने के बाद मानदेय के आधार पर सेवा दे रहे हैं। छंटनी के संबंध में फिलहाल कोई जानकारी स्थानीय स्तर पर नहीं है। कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी।उसे दे दिया गया है। आगे का फैसला रेल विभाग के बड़े अधिकारियों के स्तर से ही होगा। इधर, कर्मचारियों में चर्चा है कि लॉक डाउन के चलते रेलवे को हुए नुकसान की भरपाई आगामी समय में इसी प्रकार से कर्मचारियों की कटौती करके किया जाएगा। एक कर्मचारी से कई प्रकार के काम लिए जाएंगे। इससे की स्टाफ पर कम पैसा खर्च करना पड़े।

केंद्र सरकार ने किया था खंडन सरकार ने स्‍पष्‍ट कर दिया है था कि रिटायरमेंट आयु कम करने की खबरें भ्रामक हैं एवं इनका सत्‍यता से कोई नाता नहीं है। वर्तमान में सरकार ऐसा कोई कदम नहीं उठाने जा रही है। इसलिए कर्मचारी निश्चिंत रहें। सच यह है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु को कम करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। इस संबंध में कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने उन मीडिया रिपोर्टों का खंडन किया जिसमें यह कहा गया था कि केंद्रीय कर्मचारियों को अब जल्द ही सेवानिवृत्त करने का प्रस्ताव लाया जाने वाला है। मालूम हो कि मौजूदा व्‍यवस्‍था के अनुसार केंद्र सरकार के कर्मचारी वर्तमान में 60 साल की उम्र में सेवानिवृत्त होते हैं।

सिंह ने एक विज्ञप्ति जारी कर उन रिपोर्टों को गलत बताया कि सरकार ने सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु 50 वर्ष तक कम करने के लिए एक प्रस्ताव दिया है। मंत्री ने यह भी कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु को कम करने के किसी प्रस्ताव पर और सरकार के किसी स्तर पर चर्चा नहीं की गई है।

गलत जानकारी फैला रहे हैं कुछ तत्‍व सिंह ने कहा था, कुछ प्रेरित तत्व हैं, जो पिछले कुछ दिनों में मीडिया के एक वर्ग में इस तरह की गलत जानकारी फैला रहे हैं। वे ऐसी खबरों के लिए सरकारी सूत्रों या कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को जिम्मेदार ठहराते हैं। इससे जुड़े पक्षों के मन में उत्पन्न भ्रम दूर करने के लिए हर बार एक त्वरित खंडन करने की मांग की जाती है।