Indian Railways to rope in private sector for better services; no ...

उत्तर रेलवे के लोको कारखाने (northern railway Loco factory) में काम करने वाले एक कर्मचारी की 1984 में मौत हो गई थी। उनकी पत्नी को उसी साल आश्रित कोटे (Dependent quota) पर नौकरी मिल गई। 35 साल उन्होंने नौकरी की, अब सामने आ रहा है कि पति की मौत के बाद उन्होंने दूसरी शादी कर ली थी और इसकी जानकारी भी विभाग को नहीं दी थी।

हाइलाइट्स

  • रेलवे कर्मचारी की मौत के बाद उसकी पत्नी गलत जानकारी देकर 35 साल तक करती रही नौकरी
  • पति की मौत के बाद एक शादीशुदा व्यक्ति से कर ली दूसरी शादी, विभाग को नहीं दी जानकारी
  • महिला से शादी करने वाले की पहली पत्नी के बेटे ने पीएमओ ने की शिकायत, पीएमओ ने लोको वर्कशॉप से मांगा जवाब

उत्तर रेलवे के लोको कारखाने के एक कर्मचारी की मौत के बाद उसकी पत्नी गलत जानकारी देकर 35 साल तक नौकरी करती रही। उसने शादीशुदा व्यक्ति से दूसरी शादी कर ली, लेकिन विभाग को सूचना नहीं दी और नौकरी पूरी कर रिटायर भी हो गई। इस मामले में कर्मचारी के पति की पहली पत्नी लोको कारखाने से लेकर पीएमओ तक गुहार लगा रही हैं।

लोको कारखाने में खलासी रहे अशोक कुमार पाल की साल 1984 में मौत के बाद उनकी पत्नी मधु को तीन मई 1984 को अनुकंपा के आधार पर जूनियर क्लर्क की नौकरी मिली थी। आरोप है कि 4 अक्टूबर 1984 को उसने हिंदू विवाह अधिनियम के विरुद्ध पहले से शादीशुदा राम अवध पाल से विवाह कर लिया। राम अवध की पहली पत्नी शम्भू अपने दो बेटों के साथ अलीगंज में रहती थी। शम्भू का आरोप है कि पति के दूसरे विवाह की जानकारी पर रेलवे में शिकायत की, लेकिन अफसर टरकाते रहे। वहीं, मधु पाल का कहना है कि उनके ससुराल पहुंचने पर पति के शादीशुदा होने की जानकारी मिली, जबकि शम्भू देवी का आरोप है कि मधु ने अपॉइंटमेंट लेटर में दूसरे पति के घर का पता लिखवाया था।

बेटे की भागदौड़ लाई रंग:- शम्भू देवी के बेटे संदीप ने मां को हक दिलवाने के लिए पीएमओ में शिकायत की। इसके बाद पीएमओ ने बीते साल पांच जून को लोको वर्कशॉप से जवाब मांगा। इस पर रेलवे ने 31 अक्टूबर 2019 को जवाब भेजा। संदीप के अनुसार, वह मां के साथ लगातार गुहार लगाते रहे, लेकिन अफसर 35 साल पुराने प्रपत्र न होने की बात कहकर टरकाते रहे।

“कारखाने के कार्मिक विभाग के पास जो भी प्रपत्र होंगे, शम्भू देवी को उपलब्ध करवा दिए जाएंगे। साल 1984 में नौकरी मिलने के वक्त क्या स्थिति थी, इसकी जानकारी नहीं है।”-विवेक खरे, मुख्य कारखाना प्रबंधक, लोको वर्कशॉप