कर्मचारी संगठनों ने कहा कि डीए में रोक से कोरोना के इस संकट काल में काम कर रहे एंप्लॉयीज के मनोबल पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

केंद्रीय कर्मचारियों के बढ़े हुए 4 फीसदी डीए पर रोक लगाने और जुलाई, 2021 तक के लिए वृद्धि को स्थगित किए जाने के विरोध में कई कर्मचारी संगठन उतर आए हैं। बीएसएनएल के पूर्व कर्मचारियों के संगठन ऑल इंडिया बीएसएनएल डीओटी पेंशनर्स एसोसिएशन ने इस फैसले का विरोध किया है।

इसके अलावा बीमा कर्मचारियों के संगठन ऑल इंडिया इंश्योरेंस एंप्लॉयीज एसोसिएशन ने भी इस पर विरोध जताया है। बीमा कर्मचारियों ने कहा है कि सरकार को इस फैसले को वापस लेना चाहिए। इस फैसले से कोरोना के दौर में संकट में काम कर रहे कर्मचारियों के मनोबल पर असर पड़ेगा। बता दें कि केंद्र सरकार ने जनवरी, 2020 से लेकर जून, 2021 तक ड़ीए में इजाफे पर रोक लगा दी है।

फिलहाल सरकारी कर्मचारियों को 17 फीसदी डीए दिया जाता है। हालांकि 13 मार्च को ही सरकार ने एक तरह से होली का तोहफा देते हुए केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए में 4 फीसदी इजाफे का ऐलान किया था। माना जा रहा था कि अप्रैल महीने की सैलरी में ही बढ़ा हुआ डीए जनवरी से मार्च तक के एरियर के साथ आ जाएगा। लेकिन उससे पहले ही सरकार ने इजाफे के फैसले पर रोक लगा दी और अगले एक साल तक के लिए किसी तरह की बढ़ोतरी न होने का भी ऐलान कर दिया। यदि केंद्रीय कर्मचारियों को इस बार मिला डीए लागू हो जाता तो उन्हें कुल 21 फीसदी डीए मिलने लगता।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से डीए में रोक के बाद यूपी, मध्य प्रदेश, केरल, तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी सैलरी कट से लेकर डीए में रोक तक के फैसले लिए गए हैं। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने डीए पर रोक समेत 6 तरह के भत्तों में इजाफे को स्थगित किया है। इसके अलावा केरल ने बड़ा फैसला लेते हुए मई से लेकर सितंबर तक हर महीने 6 दिन कर्मचारियों की सैलरी काटने का फैसला लिया है। इस तरह सूबे में 5 दिनों में कुल एक महीने की सैलरी काटी जाएगी।