पहले मंत्रालय ने अपने आदेश में मार्च 2021 तक एक दिन की सैलरी अनिवार्य तौर पर जमा कराने को कहा था, लेकिन अब इसे ऐच्छिक कर दिया गया है।

वित्त मंत्रालय ने अपने उस आदेश में बदलाव कर दिया है, जिसमें उसने अपने सभी कर्मचारियों को मार्च 2021 तक हर महीने एक दिन की सैलरी PM-CARES फंड में जमा कराने का आदेश दिया था। पहले मंत्रालय ने अपने आदेश में मार्च 2021 तक एक दिन की सैलरी अनिवार्य तौर पर जमा कराने को कहा था, लेकिन अब इसे ऐच्छिक कर दिया गया है। मंत्रालय ने कहा है कि जो कर्मचारी PM-CARES फंड में अपना योगदान देना चाहते हैं, उन्हें रेवेन्यू डिपार्टमेंट को लिखित तौर पर इसकी जानकारी देनी होगी। इससे पहले आदेश यह था कि यदि कोई कर्मचारी अपना योगदान नहीं देना चाहता तो उसे लिखित तौर पर बताना होगा।

इससे स्पष्ट है कि वित्त मंत्रालय के कर्मचारियों के लिए PM-CARES फंड में हर महीने एक दिन की सैलरी डोनेट करना अनिवार्य नहीं होगा।वित्त मंत्रालय की ओर से बीते 17 अप्रैल को मार्च, 2021 तक योगदान करने वाला आदेश जारी किया गया था। सैलरी में एक दिन की यह कटौती मई के महीने से लागू की जानी थी। हालांकि बाद में मंत्रालय के रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने सभी कर्मचारियों से अपील की कि वे एक दिन की सैलरी PM-CARES फंड में दान करें। हालांकि अब यह अनिवार्य नहीं है। इस तरह से कर्मचारियों को राहत मिल गई है। बता दें कि कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते देश में अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 33,000 से ज्यादा लोग अब तक संक्रमित हुए हैं।

1.5 करोड़ केंद्रीय कर्मचारियों के डीए में इजाफे पर रोक: कोरोना संकट से निपटने के मकसद से ही PM-CARES फंड की स्थापना की गई है। इस फंड में अब तक रिलायंस ग्रुप, टाटा ग्रुप समेत तमाम दिग्गज कारोबारी समूहों की ओर से भी हजारों करोड़ रुपये की रकम जमा कराई जा चुकी है। कोरोना संकट के मद्देनजर ही केंद्र सरकार पहले ही अपने 1.5 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनरों के बढ़े हुए डीए पर रोक लगा चुकी है। 13 मार्च को ही डीए में 4 फीसदी इजाफे का ऐलान हुआ था, लेकिन अब यह फैसला वापस ले लिया गया है। इसके साथ ही जुलाई, 2021 तक के लिए इजाफे को रोका गया है।

राज्यों में भी DA के इजाफे पर लगी रोक: केंद्र सरकार के फैसले के बाद यूपी, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल समेत देश के कई राज्यों में भी कर्मचारियों के डीए में इजाफे पर रोक और सैलरी में कटौती जैसे फैसले लिए गए हैं। यही नहीं एक रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार सैन्य खर्च में भी कटौती करने पर विचार कर रही है।