ऑल इंडिया रेलवे मेन्स फेडरेशन के महासचिव शिव गोपाल मिश्र और नेशलन फेडरेशन ऑफ रेलवे मेन्स के महासचिव एम राघवैय्या ने केन्द्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर लगाई गई रोक पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने केन्द्र सरकार को पत्र भेजकर डीए पर लगाई गई रोक वापस लिए जाने की मांग की है। यूनियन नेताओं ने इसे कर्मचारियों के साथ धोखा करार दिया। यूनियन नेताओं का मानना है कि जब कर्मचारी अपनी खुशी से इस महामारी में अपना सहयोग दे रहे हैं तो ऐसी हालत में अचानक डीए बंद करना उनके हितों की अनदेखी करना है।

कोविड-19 संक्रमण से लड़ाई में वित्तीय संसाधनों को जुटाने के लिए राज्य सरकार द्वारा डीए व डीआर की नई दरों की किस्तें और छह भत्तों पर रोक का कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया है। केंद्र सरकार की तरह डीए और डीआर की नई किस्तें नहीं दिए जाने पर उतनी नाराजगी नहीं दिख रही है जितना कि नगर प्रतिकर भत्ता, सचिवालय भत्ता सहित छह भत्तों पर रोक से दिख रहा है। भत्तों पर रोक लगने से कार्मिकों को इस समय जो वेतन मिल रहा है वह कम मिलेगा। भत्तों की कटौती से सबसे अधिक नुकसान सचिवालय के कार्मिकों को है। नगर प्रतिकर भत्ता और सचिवालय भत्ता नहीं मिलने से सचिवालय में समूह घ से समूह क तक के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रतिमाह 1500 से लेकर 3500 रुपए वेतन कम मिलेगा।

सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र ने कहा है कि महंगाई भत्ते की फ्रीजिंग पर अधिक आपत्ति नहीं थी लेकिन छह भत्तों को मार्च 2021 तक स्थगित किए जाने से कर्मचारी अधिक नाराज हैं। आरोप लगाया है कि ऐसा कर वित्त विभाग के अधिकारियों ने सरकार और कर्मचारी संगठनों को आमने-सामने करने की कोशिश की है। उन्होंने भत्तों के स्थगन से संबंधित आदेश को वापस लेने की मांग सरकार से की है। उत्तर प्रदेश सचिवालय कम्प्यूटर सहायक एवं सहायक समीक्षा अधिकारी संध के उपाध्यक्ष संजीव सिन्हा ने इस निर्णय पर ऐतराज जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है।

यूपी लैब टेक्नीशियन एसोसिएशन के प्रांतीय सचिव कमल श्रीवास्तव ने राज्य सरकार द्वारा डीए और भत्तों पर रोक नाराजगी जताई है। कहा है कि कोरोना के खिलाफ टेकनीशियर योद्धा की तरह जंग लड़ रहे हैं। दो टेक्नीशियन कोरोना से पीड़ित हो गए हैं बड़ी संख्या में क्वारंटाइन किए गए हैं। राज्य सरकार का कदम हतोत्साहित करने वाला है। सरकार अपने फैसले पर फिर से विचार करे। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष सुरेश रावत, महामंत्री अतुल मिश्रा ने भी डीए के साथ छह भत्तों पर रोक का विरोध किया है। कहा है कि इस निर्णय से कर्मचारी निराश हैं। केंद्र सरकार ने तो सिर्फ डीए ही रोका लेकिन राज्य सरकार ने आगे बढ़कर छह भत्ते भी रोक दिए।