चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस पूरे विश्व में तेजी से फैल रहा है। केंद्र सरकार व राज्य सरकारों द्वारा पूरे देश को लॉकडाऊन कर लोगों को घरों में रहने की अपील की जा रही है। वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गेनाईजेशन के मुताबिक सोशल डिस्टैंसिंग ही इस महामारी से बचने का एकमात्र उपाय है। सरकार सोशल डिस्टैंसिंग को लागू करवाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। लॉकडाऊन की वजह से इतिहास में पहली बार रेल सेवाएं भी लंबे समय से ठप्प पड़ी हैं। केवल माल गाड़ियों का आवागमन जारी है।

रेल मत्रालय के निर्देशों पर अधिकांश स्टाफ से वर्क फ्रॉम होम करवाया जा रहा है, लेकिन कुछ ऑपरटिंग व मैटिनैंस के विभागों से जुड़े ऐसे रेलकर्मी भी हैं, जिन्हें मजबूरन ड्यूटी पर आना पड़ रहा है। ऐसे कर्मचारियों पर कोरोना वायरस का खतरा मंडरा रहा है। जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन की बात करें तो देखने में आया है कि यार्ड में काम करने वाले अधिकतर रेलकर्मी सोशल डिस्टैंसिंग का पालन नहीं कर रहे हैं। किसी भी कर्मचारी ने दस्ताने नहीं पहने हुए हैं। मास्क भी चंद रेल कर्मियों ने ही पहना हुआ था। सैनिटाईजर जैसी कोई चीज वहां नजर नहीं आती।

कोई रोकने वाला नहीं
हैरानी की बात है कि जहां एक ओर लोग अपने घरों के दरवाजों के हैंडल को हाथ लगाने से भी कतरा रहे हैं, वहीं ये कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर एक-दूसरे के हाथ लगे टूल इस्तेमाल कर रहे हैं। रिपेयर करने में जुटे रेलकर्मी झुंड बनाकर ट्रेनों के नीचे घुस रहे हैं जोकि खतरे से खाली नहीं है। एक ही इंजन में कई-कई रेलकर्मी चढ़कर दूसरे स्टेशनों पर काम करने जा रहे हैं लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है।

गाऊंड लेवल पर दावे खाखले
फिरोजपुर रेल मंडल के डी.आर.एम.राजेश अग्रवाल द्वारा कोरोना वायरस से निपटने के लगातार दावे किए जा रहे हैं लेकिन ग्राउंड लैवल पर उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है। अगर कहीं ऐसी लापरवाही के दौरान कोरोना । वायरस फैल गया तो रेल कर्मियों के साथ उनके परिजन भी चपेट में आ जाएंगे और स्थिति काफी विस्फोटक बन सकती है।