वित्‍त मंत्रालय ने इस बारे में 23 अप्रैल को कार्यालय ज्ञापन जारी किया है. यह कहता है कि 1 जनवरी, 2020 से देय डीए का भुगतान नहीं किया जाएगा.
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर के लिए अच्‍छी खबर नहीं है. उनके महंगाई भत्‍ते (डीए)/महंगाई राहत में वृद्धि पर सरकार ने जुलाई, 2021 तक रोक लगा दी है. कोरोना संकट को देखते हुए यह फैसला किया गया है. इसका मतलब है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 1 जनवरी 2020 से देय महंगाई भत्‍ते की किस्‍त का भुगतान नहीं किया जाएगा. पेंशनरों की महंगाई राहत के मामले में भी यह बात लागू होगी.

वित्‍त मंत्रालय ने इस बारे में 23 अप्रैल को कार्यालय ज्ञापन जारी किया है. यह कहता है कि 1 जनवरी, 2020 से देय डीए का भुगतान नहीं किया जाएगा. 1 जुलाई 2020 से 1 जनवरी 2021 से देय महंगाई भत्‍ते और महंगाई राहत की अतिरिक्‍त किस्‍तों का भुगतान भी नहीं किया जाएगा. इस तरह महंगाई भत्‍ते और महंगाई राहत का मौजूदा दरों पर भुगतान किया जाता रहेगा.

इसमें कहा गया है कि 1 जुलाई 2021 से देय महंगाई भत्‍ते और महंगाई राहत की भावी किस्‍तों को जारी करने का निर्णय लिया गया है. 1 जनवरी 2020, 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 से प्रभावी महंगाई भत्‍ते और महंगाई राहत की दरों को भावी प्रभाव से बहाल कर दिया जाएगा. उन्‍हें 1 जुलाई 2021 से प्रभावी संचयी संशोधित दर में सम्मिलित कर दिया जाएगा. 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 तक की अवधि का कोई बकाया नहीं दिया जाएगा.

यह आदेश केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों दोनों पर लागू होंगे.

22 अप्रैल को सूत्रों के हवाले से ईटी ने महंगाई भत्‍ते पर रोक लगाने की खबर दी थी. मार्च में केंद्रीय कैबिनेट ने डीए में 4 फीसदी की बढ़ोतरी की मंजूरी दी थी. इसे बढ़ाकर 21 फीसदी किया गया था.

ईटी ने बताया था कि कोरोना से लॉकडाउन के कारण सरकार के टैक्‍स राजस्‍व को बुरी तरह नुकसान पहुंचा है. वहीं, खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. ऐसा कमजोर वर्ग को सहायता देने के कारण हुआ है. यही कारण है कि सरकार के खजाने पर फिलहाल दबाव बढ़ गया है.

सरकार के कदम का 49.26 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 61.17 लाख पेंशनर पर असर पड़ेगा. सरकार साल में दो बार डीए में बदलाव करती है. इसका मकसद महंगाई में बढ़ोतरी की भरपाई करना होता है.

कोरोना वायरस का केंद्रीय कर्मचारियों पर यह पहला असर है. सरकार ने इसके पहले मंत्रियों, प्रधानमंत्री और सांसदों के वेतनों में 30 फीसदी तक की कटौती की थी. इसके अलावा एमपीएलएडी स्‍कीम को भी दो साल के लिए निलंबित कर दिया गया था ताकि कोरोना से लड़ाई के लिए ज्‍यादा फंड उपलब्‍ध रहे. इस स्‍कीम को निलंबित कर सरकार ने करीब 8,000 करोड़ रुपये बचाए हैं.

सरकार के इस फैसले से केंद्र सरकार के करीब 52 लाख कर्मचारी और 65 लाख पेंशनर प्रभावित होंगे। उन्हें डीए की 3 अतिरिक्त किस्तों का नुकसान हो सकता है। अब उन्हें डीए की अगली अतिरिक्त किस्त 1 जुलाई 2021 के बाद ही मिलेगी। हालांकि सरकार ने साफ कर दिया है कि 1 जुलाई 2021 के बाद अगर महंगाई भत्ते में इजाफा होता है तो सरकार पिछली बढ़ोतरी को भी ध्यान में रखेगी। केंद्रीय कर्मचारियों को साल में दो बार डीए की अतिरिक्त किस्त मिलती है। पहली 1 जनवरी से मिलती है जबकि दूसरी 1 जुलाई से। सरकार ने जो अवधि तय की है, उसमें 3 किस्तें शामिल होंगी। बता दें कि सरकार को इन भत्तों को रोकने से वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2021-2022 में कुल 37,530 करोड़ रुपये की बचत होगी। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार के फैसले के बाद राज्य सरकारें भी अपने कर्मचारियों के लिए ऐसा ही करेंगी। राज्य सरकारों ने भी जुलाई 2021 तक महंगाई भत्ते की बढ़ी दर पर भुगतान नहीं किया तो इससे उन्हें 82,566 करोड़ रुपये तक की बचत होगी।

इंडिगो ने अपने कर्मचारियों की सैलरी में कटौती के निर्णय को वापस ले लिया है। कंपनी ने कहा कि यह निर्णय सरकार की उस अपील पर किया गया है जिसमें उसने कंपनियों से कर्मचारियों के वेतन में कटौती नहीं करने की बात कही थी। कंपनी ने कहा कि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने इच्छा से वेतन कम लेने का फैसला किया है।
कोरोना वायरस के कारण केरल सरकार ने राज्य में चुने हुए प्रतिनिधियों की सैलरी में एक साल तक 30 फीसदी कटौती करने का फैसला किया है। राज्य के सभी मंत्री, विधायक, सरकारी बोर्ड के सदस्य और अन्य प्रतिनिधि एक साल तक 30 फीसदी सैलरी कम लेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के साथ दोपहर 12 बजे मीटिंग करेंगे। इस मीटिंग में कोरोना के चलते तमाम छोटे उद्योगों और दूसरे सेक्टरों के लिए राहत पैकेज पर कोई फैसला लिया जा सकता है। मीटिंग में लॉकडाउन 2 से जुड़े कुछ और फैसले भी हो सकते हैं।