पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने अपनी धरोहरों को बचाने, संजोने और उसे प्रसारित करने का नायाब तरीका खोज निकाला है। अब रेलवे के अधिकारी किसी भी छोटे-बड़े कार्यक्रम आदि में उपहार स्वरूप बाजार से खरीदे गए किसी सामान की जगह टेराकोट में बने इंजन को भेंट करेंगे। एक तो यह तोहफा शानदार होगा, दूसरे वन डिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट को भी बढ़ावा मिलेगा।








औरंगाबाद में रेल इंजन की डिजाइन भी तैयार

पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजीव अग्रवाल की पहल पर रेलवे प्रशासन ने इस योजना को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी है। रेलवे प्रशासन ने औरंगाबाद में रेल के इंजन की डिजाइन भी तैयार कर दी है। अभी उसपर अंतिम निर्णय नहीं लग पाया है।





style=”text-align: justify;”>साइज को लेकर चल रहा मंथन

साइज आदि को लेकर विभागीय अधिकारियों में मंथन चल रहा है। जल्द ही रेल इंजन का साइज और मॉडल फाइनल कर लिया जाएगा। उसके बाद पूर्वोत्तर रेलवे के कार्यक्रमों में यह चलन में आ जाएगा। दरअसल, जनपद के औरंगाबाद गांव में टेराकोटा से सामान बनाए जाते हैं।

वन डिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट है टेराकोटा

यह टेराकोटा गोरखपुर के वन डिस्ट्रिक-वन प्रोडक्ट के रूप में शामिल है। पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डा. एपीजे अब्दुल कलाम गोरखपुर दौरे के दौरान इस गांव में पहुंचकर टेराकोटा कला को देख प्रभावित हुए थे। उन्होंने उत्साह भी बढ़ाया था। अब पूवोत्तर रेलवे प्रशासन इस पूर्वांचल की धरोहर घर-घर पहुंचाने की योजना तैयार की है। गोरखपुर जंक्शन के वीआइपी गेट पर टेराकोटा की कलाकृतियां लोगों को बरबस अपनी तरफ आकर्षित करती रहती हैं।




इन अवसरों पर होगा वितरित

दरअसल, रेलवे में सम्मान समारोह आयोजित होते रहते हैं। प्रत्येक साल अप्रैल में रेल पुरस्कार वितरण समारोह के तहत महाप्रबंधक और विभागीय सम्मान समारोह आयोजित किए जाते हैं। मंडल स्तर पर भी कार्यक्रमों का आयोजन होता है। इस वर्ष से आयोजनों में टेराकोटा के उपहारों की ही धूम रहेगी।