भारतीय रेल: बजट से 70,000 करोड़ रुपए की मदद, 1.61 लाख करोड़ रुपए खर्च का प्रस्ताव

वित्तवर्ष 2019-20 में पूंजीगत व्यय के लिए 1.56 लाख रुपए निर्धारित किए गए थे जो 2018-19 के मुकाबले 17.2 प्रतिशत अधिक था। पुनरीक्षित बजट अनुमान 2019-2020 के मुकाबले बजट अनुमान 2020-21 में यात्री किरायों, माल भाड़े, अन्य तरीकों और रेलवे भर्ती बोर्ड की आय में कुल मिला कर 9.5 फीसदी वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया है।








बजट 2020-21 में 12,000 करोड़ रुपए नई लाइनों को बिछाने के लिए, 2,250 करोड़ रुपए अमान परिवर्तन के लिए, 700 करोड़ दोहरीकरण, 5,786.97 करोड़ रुपए रेल के डिब्बे एवं इंजन और 1,650 करोड़ रुपये सिग्नल और दूरसंचार के लिए आवंटित किए गए हैं। इस वर्ष रेल यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए 2,725.63 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

बजट में 1,26.5 करोड़ टन माल ढुलाई का लक्ष्य रखा गया है जो चालू वित्त वर्ष के पुनरीक्षित बजट अनुमान से 4.2 करोड़ टन (3.4 प्रतिशत) अधिक है। आने वाले वित्त वर्ष में यात्री किराया से 61,000 करोड़ रुपए और माल ढुलाई से 1,47,000 से राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। इस प्रकार परिचालन से रेलवे की कुल आय 2,25,613 करोड़ रुपये होने का अनुमान है जो पुनरीक्षित अनुमान 2019-20 से 9.6 प्रतिशत अधिक है।




रेलवे का परिचालन अनुपात बजट अनुमान 2019-20 में 95 फीसदी रखा गया था जिसे पुनरीक्षित अनुमान 2019-20 में 97.46 प्रतिशत किया गया था। अर्थात रेलेवे की कमाई का अनुमान से अपेक्षाकृत ज्यादा हिस्सा उसके अपने परिचालन पर खर्च हो जाता है। वर्ष 2020-21 में रेलवे के परिचालन अनुपात 96.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

बजट में रेल पटरियों के किनारे स्थित रेलवे की खाली जमीन पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने और चार स्टेशन को पुन:विकसित करने एवं 150 ट्रेनों को सार्वजनिक-निजी भागीदारी के आधार पर चलाने का प्रस्ताव किया गया है। बजट में प्रमुख पर्यटक स्थलों को जोड़ने के लिए तेजस की तरह और रेलगाड़ियां चलाने का प्रस्ताव किया गया है।




वित्तमंत्री ने 18,600 करोड़ रुपए की लागत से 148 किलोमीटर लंबे बेंगलुरु उपनगरीय परिवहन परियोजना का प्रस्ताव किया जो मेट्रो मॉडल पर विकसित किया जाएगा। परियोजना के लिए केंद्र सरकार 20 प्रतिशत राशि देगा और 60 फीसदी तक की बाहरी सहायता की सुविधा देगा। उन्होंने कहा कि जल्द खराब होने वाले कृषि उत्पादों के लिए राष्ट्रीय शीत आपूर्ति श्रृंखला के विकास की योजना के तहत निजी सरकारी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल में किसान रेल बनाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का चुनिंदा मेल एक्सप्रेस और मालगाड़ियों के जरिए जल्द खराब होने वाले सामान की ढुलाई के लिए रेफ्रिजरेटेड पार्सल वैन का भी प्रस्ताव है। हालांकि, रेलवे का बड़ा भार राजस्व व्यय है। अनुमान है कि आगमी वित्त वर्ष में केवल इसी मद पर रेलवे को 92,993.07 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। यह इस साल से 6,000 करोड़ रुपए अधिक होगा।

Source:- Live Hindustan