कंपनियों और संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए श्रम मंत्रालय के अधीन आने वाला कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानि ईपीएफओ, पीएफ और पेंशन स्कीम चलाता है। इसके जरिए ही कामगारों को सेवानिवृत्त होने पर पेंशन मिलती है। अगर किसी कारणवश ईपीएफ सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसके परिवार यानी पत्नी या पति और बच्चों को भी पेंशन का फायदा मिलता है। इसे फैमिली पेंशन भी कहा जाता है।








ईपीएफ ने फैमिली पेंशन के लिए 10 साल की सर्विस की अनिवार्यता भी नहीं रखी है। यानी 10 साल पूरा होने से पहले भी अगर कर्मचारी की मृत्यु ही जाती है तो उसके परिवार को पेंशन का फायदा मिलेगा। वहीं कर्मचारी तभी पेंशन का हकदार होता है जब वह 10 साल नौकरी कर ले। यदि कर्मचारी शादीशुदा नहीं है तो उसके नॉमिनी को पेंशन मिलती है।




केंद्र सरकार अगले महीने पेश होने वाले बजट में पारिवारिक (फैमिली) पेंशनधारकों को बड़ी राहत दे सकती है। फैमिली पेंशन धारकों को मिलने वाल सालाना छूट की सीमा को बढ़ाकर 50 हजार रुपये किया जा सकता है। हिन्दुस्तान को सूत्रों के जरिए मिली जानकारी के मुताबिक वित्त मंत्रालय को श्रम मंत्रालय ने इस मोर्चे पर राहत देने का प्रस्ताव भेजा है। वित्त मंत्रालय प्रस्ताव पर विचार कर इसे बजट में शामिल कर सकता है।




क्या है वर्तमान स्थिति : आश्रितों को मिलने वाली पेंशन पर मिलने वाली रकम का एक तिहाई हिस्सा या फिर 15 हजार रुपये की रकम, दोनों में से जो भी कम होता है सिर्फ उसी पर टैक्स छूट मिलती है। फैमिली पेंशन के मद में इसके पात्र व्यक्ति को स्टैडर्ड डिडक्शन का फायदा भी नहीं मिलता है। यही वजह है कि सरकार आश्रितों को भी मिलने वाली पेंशन पर स्टैडर्ड डिडक्शन के बराबर छूट देने पर विचार कर रही है।