रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने रेलवे में ई-टिकटों की गैरकानूनी बिक्री के ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार दुबई, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सिंगापुर और यूगोस्लाविया में हवाला, मनी लांडिंग और आतंकी फं¨डग से जुड़े हैं। इस सिलसिले में एजेंसियों ने ई-टिकट बुकिंग सॉफ्टवेयर बेचने वाले गुलाम मुस्तफा समेत 27 लोगों को गिरफ्तार किया है। अब आंतरिक सुरक्षा को खतरे के पहलू से मामले की जांच की जा रही है। आइबी और एनआइए ने भी जांच शुरू कर दी है। गिरफ्तार लोगों पर संगठित अपराध नियंत्रण कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।








आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ने मंगलवार को बताया कि भुवनेश्वर से गिफ्तार मुस्तफा ने धंधे की शुरुआत 2015 में आइआरसीटीसी एजेंट के रूप में की थी। बाद में भारत से दुबई गए हामिद अशरफ के संपर्क में आकर ई-टिकटों की गैरकानूनी बिक्री का काम शुरू किया। आरपीएफ द्वारा बेंगलुरु में डाले गए कई छापों में बार-बार मुस्तफा का नाम आ रहा था। इसलिए ट्रैकिंग कर उसे गिरफ्तार किया गया। 10 दिनों से आइबी, स्पेशल ब्यूरो, ईडी और एनआइए उससे पूछताछ कर रही है। नेटवर्क से जुड़े 20 हजार रेलवे एजेंटों को अभी नहीं छुआ गया है। मुस्तफा से आइआरसीटीसी की 563 आइडी मिली है। एसबीआइ की 2,400 शाखाओं व 600 क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में इनके खाते होने का शक है। सिंगापुर स्थित एक भारतीय कंपनी के खाते में भी पैसे ट्रांसफर हो रहे हैं। कंपनी की गतिविधियों की पहले से जांच हो रही है। बांग्लादेश और यूगोस्लाविया के मानव अंग तस्करी से जुड़े लोगों से भी इस समूह का संपर्क पाया गया है।




एक मिनट में तीन टिकटों की बुकिंग

’ आइआरसीटीसी की वेबसाइट हैक करने के लिए ये लोग एएनएमएस सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं।

’ आइआरसीटीसी की वेबसाइट पर आम लोग ढाई मिनट में टिकट बुक करते हैं।

’ इस सॉफ्टवेयर से एक मिनट में तीन टिकट बुक होते हैं। इस तरह 85} टिकट इस गिरोह को मिल जाते हैं।

’ रेलवे अधिकारियों के अनुसार गैरकानूनी बिक्री के बावजूद इन टिकटों से रेलवे को पूरा पैसा मिल जाता है।

’ यह गिरोह कन्फर्म टिकट दिलाने के नाम पर ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे लेता है।

नई दिल्ली में मंगलवार को प्रेस कान्फ्रेंस कर ई टिकटिंग रैकेट की जानकारी देते आरपीएफ के महानिदेशक अरुण कुमार ’ एएनआइ




बेंगलुरु है मुस्तफा का ठिकाना

गुलाम मुस्तफा रैकेट का संचालन बेंगलुरु से करता है। वह गिरिडीह, झारखंड का निवासी है। ओडिशा के मदरसे में पढ़ा है। टिकटों की दलाली से शुरुआत। बाद में ई-टिकट एजेंट बना, फिर गैरकानूनी सॉफ्टवेयर बेचने लगा। कंप्यूटर सॉफ्टवेयर का जानकार है व डार्कनेट में पहुंच के लिए अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करता है। इसके लैपटॉप में लाइनक्स आधारित हैकिंग सिस्टम मिला। बिट क्वाइन और अन्य क्रिप्टो करेंसी का कारोबार भी करता है।

हामिद दुबई से चला रहा रैकेट

हामिद अशरफ दुबई से रैकेट चला रहा है। वह एएनएमएस सॉफ्टवेयर का डेवलपर है। इसकी टीम क्लाउड के मार्फत सर्वर मेंटेन करती है। भारत में इससे जुड़े 18-20 लीड सेलर/सुपर एडमिन हैं। ये उक्त साफ्टवेयर 200-300 पैनल सेलर्स को बेचते हैं। इससे प्राप्त पैसे हवाला के जरिए हामिद को भेजा जाता है। पैनल सेलर्स आगे 20 हजार एजेंटों को सॉफ्टवेयर बेचते हैं। एक पैनल में 20 आइडी होते हैं, जिसके लिए एजेंटों से हर महीने 28 हजार रुपये लिए जाते हैं।