इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि वर्ष 2005 से पहले जारी विज्ञापन के तहत चयनित कमचारी पुरानी पेंशन योजना का लाभ पाने के हकदार हैं। इसी के साथ कोर्ट ने सिंचाई विभाग में वर्ष 1999 में जारी विज्ञापन के तहत चयनित अभियंताओं को पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी ने दिया है। कोर्ट ने कहा कि याचियों की नियुक्ति प्रक्रिया 2005 से पहले शुरू हो चुकी थी। विभाग की लेटलतीफी से उन्हें वर्ष 2005 के बाद नियुक्ति मिली इसलिए नियुक्ति में देरी के लिए याचियों का कोई दोष नहीं है। सिंचाई विभाग में इंजीनियरों की भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग ने 20 अक्तूबर 1999 को विज्ञापन जारी किया। इसके लिए परीक्षा 22 व 23 दिसंबर 2001 को हुई।








इस दौरान दाखिल एक याचिका पर हाईकोर्ट ने याची सिविल इंजीनियरों को भी नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया। यह भी कहा कि उनके परिणाम न जारी किए जाएं। इस आदेश के कारण आयोग ने परीक्षा आयोजित करने के बाद पूरा चयन परिणाम रोक दिया। पांच जुलाई 2005 को हाईकोर्ट ने वह याचिका खारिज कर दी।




उसके बाद आयोग ने 12 मार्च 2006 को अंतिम चयन सूची जारी की। याची उसमें चयनित हुए और 2006 में उन्हें नियुक्ति मिली। इस बीच राज्य सरकार ने 28 मार्च 2005 को अधिसूचना जारी कर पुरानी पेंशन योजना समाप्त कर दी। अधिसूचना में कहा गया कि एक अप्रैल 2005 के बाद जो भी कर्मचारी सेवा में नियुक्त हुए हैं, उन्हें पुरानी पेंशन का लाभ नहीं दिया जाएगा। इसके स्थान पर नई पेंशन योजना लागू की गई।




याचियों का कहना था कि उनके बाद आयोग ने 2002 में जूनियर इंजीनियरों के पद विज्ञापित किए और चयन प्रक्रिया पूरी कर उन्हें नियुक्ति प्रदान कर दी। उस नियुक्ति में चयनित कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना का लाभ पा रहे हैं जबकि याचियों की चयन प्रक्रिया उससे पहले शुरू हुई थी। कोर्ट में याचिका लंबित होने के कारण उन्हें नियुक्ति मिलने में देर हुई इसलिए उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं दिया जा रहा है।