रेलवे ट्रेनों को चलाने में कम समय लगे, इसके लिए ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोजेक्शन (एटीपी) सिस्टम लागू करने जा रहा है। एटीपी सिस्टम कुछ हद तक एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) सिस्टम की तरह काम करेगा। इससे दो ट्रेनों को चलाने के बीच का अंतर औसत 20 मिनट से कम होकर 6 से 7 मिनट रह जाएगा। इससे ट्रेन कम समय में स्टेशन पर पहुंचेंगी। एटीपी सिस्टम को लागू करने के िलए 640 किमी में पायलट प्रोजेक्ट की मंजूरी दे दी गई है। टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अगले वर्ष अप्रैल से काम शुरू होने की संभावना है, जो 24 से 30 माह में पूरा हो जाएगा।









क्या है एटीपी सिस्टम?
इसमें रेडियो फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल किया जाएगा। एक रेडियो ट्रेन ड्राइवर के पास और दूसरा स्टेशन मास्टर और कंट्रोलर के पास होगा। दोनों जगह सिग्नल के लिए एंटीना लगा होगा। इससे ट्रेन और कंट्रोलर लगातार आपस में संपर्क में रहेंगे। जब ट्रेन स्टेशन पार कर जाएगी, तो अगले स्टेशन मास्टर या कंट्रोलर के पास सिग्नल पहुंच जाएगा। इस सिस्टम का फायदा यह होगा कि कोई दिक्कत आने पर ड्राइवर और स्टेशन मास्टर आपस में बात भी कर सकते हैं। इसके लिए पूरे ट्रैक पर नेटवर्क बिछाया जाएगा।





इसका फायदा
रेलवे बोर्ड के संकेत और दूर संचार सदस्य प्रदीप कुमार ने बताया कि एटीपी सिस्टम से कंट्रोलर को ट्रेन के एक सिग्नल से दूसरे सिग्नल तक पहुंचने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे 200 किमी दूर से ही ट्रेन ऑपरेट हो जाएगी।





मौजूदा सिस्टम
ट्रैक पर सिग्नल के पास डिवाइस लगी होती है। ट्रेन सिग्नल के पास आती है तो डिवाइस सूचना स्टेशन मास्टर को देती है, इसे वो कंट्रोलर को भेजता है। कंट्रोलर तब तक दूसरी ट्रेन नहीं आने देता, जब तक पहली न गुजर जाए।

इन सेक्शन में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

  • नागपुर से बडनेरा (मध्य रेलवे)
  • झांसी से बीना ( उत्तर मध्य रेलवे)
  • रेनीगुंटा से येरागुंटला ( दक्षिण मध्य रेलवे)
  • विजयनगरम से पलासा (ईस्ट कोस्ट रेलवे)