रेलवे बोर्ड का फैसला, डेढ़ से दो लाख रेलवे कर्मचारियों की नौकरी खतरे में, खाका तैयार

रेलवे समय पर ट्रेन चलाने और रफ्तार को बढ़ाने के लिए रख रखाव के वक्त को छह घंटे से घटाकर दो घंटे करने की योजना बना रहा है। रेलवे बोर्ड टर्मिनल पर प्राथमिक रख रखाव को आउटसोर्स करने की तैयारी है। जिससे सवा से डेढ़ लाख रेलवे कर्मचारियों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। इन्हें चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।








इससे ट्रैक क्षमता में वृद्धि होगी, नई ट्रेन को चलाने की जगह बनेगी व अधिक यात्रियों को लाया जा सकेगा। रेलवे दस्तावेज के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में इंजन-कोच और बुनियादी ढांचे के बेहतर इस्मतेमाल के लिए टर्मिनल पर यात्री ट्रेन के रख रखाव के समय को छह घंटे से घटाकर दो अथवा तीन घंटे करने की जरूरत है। ट्रेन के रख रखाव के कार्य को युक्तिसंगत बनाने के लिए अध्ययन कराया जाएगा। एलएचबी कोच व नई तकनीक की मदद से ट्रैक क्षमता में बढ़ोत्तरी होगी, नई ट्रेन चलेंगी व समयपालन में भी सुधार होगा।







ट्रेन के नियमित रख रखाव को आउटसोर्स करना खतरनाक है। रेलवे ने ट्रैक सहित कई क्षेत्र आउटसोर्स के हवाले कर दिया है। पर ट्रेन रख रखाव को आउटसोर्स करना यात्रियों की जान खतरे में डालना है। यूनियन विरोध करेगी और अन्य उपाय के बारे में रेलवे बोर्ड से चर्चा करेगी। -शिव गोपाल मिश्रा, महामंत्री, एआईआरएफ