इन मांगों को सरकार के सामने रखने वाले कई बड़े मजदूर संगठन हैं। कर्मचारी संगठनों ने आयकर छूट सीमा बढ़ाने की भी मांग की है।

अगर मोदी सरकार ने मजदूर संगठनों की बात मानी तो कर्मचारियों की मिनिमम सैलरी 21,000 रुपये हो सकती है। इसके साथ ही कर्मचारियों की कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के तहत पेंशन 6,000 रुपये हो जाएगी। इन मांगों को सरकार के सामने रखने वाले कई बड़े मजदूर संगठन हैं। कर्मचारी संगठनों ने आयकर छूट सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। मांग है कि 10 लाख रुपये तक की सालाना इनकम को टैक्स मुक्त किया जाए। बजट पूर्व बैठक में संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई बैठक में यह मांग की गई।








देश में बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे पर भी इस बैठक में चर्चा की गई। देश में रोजगार को कैसे बढ़ाना है इसपर भी सुझाव दिए गए। संगठनों का कहना है कि ढांचागत क्षेत्र की परियोजनाओं, कृषि क्षेत्र और सामाजिक क्षेत्रों में निवेश को बढ़ाना चाहिए। संगठनों ने मांग की है कि इन सेक्टर्स में बजट में विशेष तवोज्जों दी जानी चाहिए। नौकरी पर मंडराते खतरे को लेकर भी चिंता जाहिर की गई। संगठनों ने कहा है कि एमटीएनएल, बीएसएनएल जैसे संस्थानों को अवसर देने की जरूरत है जैसे की अन्य प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों को दिए जाते हैं। संगठन ने इन संस्थानों से जबरन रिटायरमेंट (वीआरएस) को कर्मचारियों को जबरन नौकरी के निकालने के समान माना।





बता दें कि केंद्र सरकार के 50 लाख से ज्यादा कर्मचारी भी मिनिमम सैलरी में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। कर्मचारियों की मांग है की है कि मोदी सरकार फिटमेंट फैक्टर बढ़ाए और न्यूनतम मूल वेतन के रूप में 26,000 रुपए वेतन दे।




अगर सरकार इस पर मुहर लगाती है तो केंद्र की सैलरी में 8000 रुपए तक की बढ़ोतरी होगी।कर्मचारी न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी के अलावा फिटमेंट फैक्टर में भी इजाफा चाहते हैं। मौजूदा फिटमेंट फैक्टर 2.57 गुणा है, जबकि वे इसे 3.68 गुणा करने की मांग की जा रही है। वहीं सरकार मंहगाई भत्ते में भी बढ़ोत्तरी कर सकती है। माना जा रहा है कि सरकार न्यू ईयर से पहले इसकी घोषणा कर सकती है।