पुरानी पेंशन बहाली, संविदा कर्मियों को विनियमित करने समेत 16 सूत्रीय मांगों को लेकर राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने अध्यक्ष राजेन्द्र शुक्ल के नेतृत्व में रोडवेज परिसर में धरना दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया।

धरने को संबोधित करते हुए रोडवेज इम्पलाइज एसोसिएशन के नेता प्रेम नारायण तिवारी ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की यह कैसी व्यवस्था है कि सांसद, विधायक शपथ लेने के तत्काल बाद ही पेंशन के हकदार हो जाते है, जबकि कर्मचारी 33 साल सेवा करने के बाद भी पेंशन का अधिकारी नहीं है।








पेंशन की वर्तमान प्रणाली कर्मचारियों को मंजूर नहीं हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष बालेन्दु मिश्र ने कहा कि सरकारी क्षेत्र में खाली पड़े पदों को सरकार संविदा व ठेकेदारी प्रथा के माध्यम से भर रही है। इससे कर्मचारियों का भविष्य असुरक्षित है। प्रयोगशाला संघ के अध्यक्ष्ज्ञ उमेश पाण्डेय ने कहा कि देश के सभी सार्वजनिक सेवा कर्मियों के लिए केन्द्रीय वेतन आयोग के स्थान पर राष्ट्रीय वेतन आयोग का गठन किया जाना चाहिए।








फार्मेसिस्ट संघ के अध्यक्ष बलिराम यादव ने कहा कि अगर हमारी मांगे नहीं मानी गयी तो पेंशन के लिए आर-पार का संघर्ष करेंगे और बुढ़ापे की लाठी पेंशन को लेकर ही रहेंगे। पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष श्रीराम त्रिपाठी ने कर्मचारियों का पिछला बकाया समेत इस साल बोनस का शीघ्र भुगतान करने की मांग की। धरने को दुर्गेश तिवारी, नवनाथ प्रसाद, धर्मेन्द्र तिवारी, दीनानाथ मिश्र, अयोध्या पटेल, अजय राय, नौशादुल्लाह खां, राजू, रमावती ओझा, रामबली यादव, अरविंद प्रताप शाही, वीरबहादुर यादव, गोरख मिश्र, मनोज कुमार, सत्येन्द्र सिंह, नागेन्द्र, शिव प्रसाद यादव, कमरूद्दीन, धर्मेन्द्र यादव, रामानंद शर्मा आदि ने संबोधित किया।