महत्वाकांक्षी वंदे भारत एक्सप्रेस प्रोजेक्ट में अनियमितताएं बरतने पर रेलवे बोर्ड की विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आइसीएफ) चेन्नई के महाप्रबंधक (सेवानिवृत) सहित आठ अधिकारी संदेह के घेरे में हैं। अफसरों से जवाब तलब किया गया है। कुछ अधिकारियों का इधर से उधर तबादला भी कर दिया गया है। बता दें वंदे भारत एक्सप्रेस तैयार होने के दौरान मैकेनिकल और इलेक्टिकल विभाग में चल रही खींचतान और 40 नई ट्रेन बनाने का टेंडर डालकर तीन कंपनियों को आवंटित करने का मामला ‘दैनिक जागरण’ ने प्रमुखता से उठाया था।








वंदे भारत एक्सप्रेस के 40 नई ट्रेन बनाने का टेंडर अलॉट किया गया था। टेंडर के लिए करीब आठ कंपनियों ने भागीदारी की थी। इनमें उन कंपनियों को बाहर कर दिया गया, जिन्होंने भारत में कभी रेलवे रैक नहीं बनाए थे। इन कंपनियों में पॉवरनेटिक्स इक्विपमेंट प्राइवेट लिमिटेड नवी मुंबई ने 9 करोड़, इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड परवाणु 3.39 करोड़, कैफ इंडिया प्राइवेट लिमिटेड नई दिल्ली ने 8.72 करोड़, मेधा सवरे ड्राइव्स प्राइवेट लिमिटेड हैदराबाद ने 8.51 करोड़, कमिंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड पुणो ने 10.32 करोड़, टाइटागढ़ वैगंस लिमिटेड कोलकाता ने 14.94 करोड़, भारत हैवी इलेक्टिकल्स लिमिटेड नई दिल्ली ने 11.18 करोड़ और अवध रेल इंफ्रा लिमिटेड, लखनऊ ने 5.43 करोड़ का टेंडर भरा था। रेलवे ने मेधा सवरे ड्राइव्स लिमिटेड को दो और स्पेन की एक कंपनी को एक रैक (ट्रेन) बनाने की हामी भरी थी। लेकिन, बाद में मेधा ने सवाल उठाते हुए वंदे भारत रैक के निर्माण से हाथ खींच लिए थे। हालांकि इन चालीस रैक में से स्पेन की एक कंपनी को एक रैक बनाने का टेंडर अलॉट कर दिया गया। यह कंपनी पहली बार रेलवे के रैक बना रही है, इसलिए रेलवे ने महज एक रैक बनाने का टेंडर अलॉट किया।




इन अफसरों से जवाब तलब: विजिलेंस जांच में आठ अफसरों से जवाब तलबी की है। इनमें सुधांशु मनी (सेवानिवृत जीएम, आइसीएफ), एलवी त्रिवेदी (प्रिंसिपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर), एसपी वावरे (प्रिंसिपल चीफ इलेक्टिकल इंजीनियर सेंट्रल रेलवे), एनके गुप्ता (प्रिंसिपल चीफ इलेक्टिकल इंजीनियर आइसीएफ), कंवलजीत (फाइनेंशियल एडवाइजर एंड चीफ अकाउंट्स ऑफिसर), डीपी दाश (सीनियर एडिमिनस्ट्रेटिव ग्रेड आफिसर ईस्ट कोस्ट रेलवे), शुभ्रांशु (चीफ एडिमिनस्ट्रेटिव आफिसर, रेल व्हील फैक्ट्री बेला), अमिताभ सिंघल (सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव ग्रेड ऑफिसर) शामिल हैं।




पीएमओ तक पहुंचा विवाद, फाइलें तलब कीं

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली : वंदे भारत से जुड़े विवादों की आंच पीएमओ तक पहुंच गई। ट्रेनों के निर्माण में हो रहे विलंब से नाराज पीएमओ ने रेलवे बोर्ड से मामले की फाइलें तलब की हैं। रेलवे बोर्ड का कहना है कि एक ही कंपनी मेधा को ट्रेन के अधिकांश उपस्करों की आपूर्ति का ठेका देने के कारण ये स्थिति पैदा हुई। दूसरी कंपनियों ने टेंडर के वक्त ही इस ओर इशारा किया था और इसकी शिकायत की थी। इसके बाद विजिलेंस जांच और अतिरिक्त सदस्य की अध्यक्षता में कमेटी गठित की, जिसने खामियां पाईं। समिति के अनुसार वंदे भारत में प्रयुक्त बोगी मेनलाइन के बजाय केवल ईएमयू के लिए उपयुक्त है। इसकी राइडिंग क्वालिटी आरडीएसओ के मानकों पर खरी नहीं उतरती। इसके ऑटोमैटिक दरवाजों और ब्रेक सिस्टम में शुरू में जो खराबी देखने को मिली उसका कारण मानकों के बगैर इनकी आपूर्ति थी। 2016 से लेकर अगस्त, 2017 तक

आइसीएफ ने ईएमयू मेमू की आपूर्ति के लिए चार बार टेंडर आमंत्रित किए। इन सबमें पात्रता की ऐसी शतेर्ं रखी गईं कि जिससे दो बार मेधा और दो बार बंबार्डियर को अनुबंध प्राप्त हुए। जबकि कम बोली के बावजूद चीनी फर्म झुझोऊ, सरकारी कंपनी बीएचईएल और बीईएमएल की उपेक्षा की गई।