रेलवे प्रशासन अब डिजिटल पास की तैयारी में भी जुट गया है। जल्द ही रेलकर्मियों को सुविधा पास की ऑनलाइन सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। पास बनवाने के लिए भागदौड़ से मुक्ति तो मिलेगी ही, रखरखाव का झंझट भी नहीं रहेगा। दुरुपयोग और फर्जीवाड़ा पर भी अंकुश लगेगा।








रेलवे बोर्ड स्तर पर कर्मचारियों का डाटाबेस तैयार करने के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है। नई व्यवस्था में जो पास बनेगा उसपर कर्मचारी का डिजिटल सिग्नेचर होगा। पास के आधार पर टिकट लेते समय बुकिंग क्लर्क सिग्नेचर का मिलान कर लेगा। यानी, अब कर्मचारी दूसरे को भेजकर आरक्षित टिकट नहीं बुक करा सकते हैं। उन्हें खुद काउंटर पर पहुंचना होगा। उनके पास का कोई दूसरा प्रयोग भी नहीं कर पाएगा। स्वयं कर्मचारी भी अपने का पास का न दुरुपयोग कर पाएंगे। पास बनाने में भी हीलाहवाली नहीं चलेगी। दरअसल, रेलवे का सिस्टम धीरे-धीरे डिजिटल प्लेटफार्म पर आ रहा है। टिकट से लगायत बुकिंग तक सबकुछ ऑनलाइन होने लगे हैं। हाजिरी भी बायोमीटिक मशीन से ऑनलाइन शुरू हो चुकी है।




रेलवे को उठाना पड़ रहा नुकसान : भारतीय रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो सुधर नहीं रहा। कैग ने रेल यात्री किराये में रियायतों के साथ खासतौर पर रेल अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलने वाले पास को भी एक वजह माना है। रिपोर्ट में कहा गया कि रेलवे को किराए से होने वाली आय में 8.42 फीसद की कमी दर्ज की गई।




यह भी जानें

’ राजपत्रित अधिकारियों को एक साल में छह पास मिलते हैं। रिटायर होने पर तीन।

’अराजपत्रित कर्मचारी को तीन पास मिलते हैं। रिटायर होने पर दो।

’ चतुर्थ श्रेणी कर्मी को एक पीला और दो लाल पास मिलते हैं। रिटायर पर दो।

’ रेलकर्मियों के पढ़ने वाले बच्चों को भी मिलती है पास की सुविधा।

’ राजपत्रित और अराजपत्रित रेलकर्मी को मिलती है एसी द्वितीय श्रेणी में यात्र की सुविधा।

’चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को मिलती है एसी तृतीय और स्लीपर श्रेणी में यात्र की सुविधा।