आरएसएस से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) ने श्रम संहिता कानून के तहत दिन में नौ घंटे काम के प्रस्तावित नियम पर आपत्ति जताई है और वर्तमान के आठ घंटे से भी घटाकर इसे छह घंटे किए जाने की मांग की है। अन्य ट्रेड यूनियनें भी मसौदा नियमों से असंतुष्ट हैं और शीघ्र ही सरकार को अपनी आपत्तियों से अवगत कराएंगी। मसौदा नियमों पर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) के महामंत्री विरजेश उपाध्याय ने कहा कि मसौदा नियमों में अनेक विसंगतियां हैं, जिनमें संशोधन की जरूरत है। नए नियमों में पूर्व के उन कानूनी प्रावधानों की उपेक्षा की गई है जिन्हें वेतन संहिता में समाहित कर दिया गया है।








एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मसौदा नियमों में काम के घंटों को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है। काम के घंटे एक दिन में छह से ज्यादा नहीं होने चाहिए। इसके अलावा न्यूनतम वेतन संबंधी नियम भी अस्पष्ट हैं। नियमों में नॉन-स्किल्ड कर्मचारी को सेमी-स्किल्ड और फिर स्किल्ड कर्मचारी के तौर पर अपग्रेड करने का कोई प्रावधान नहीं है। बीएमएस मसौदा नियमों का अध्ययन कर रही है और दो-तीन रोज में विस्तृत सुझावों के साथ श्रम मंत्रलय से संपर्क करेगी।




कुछ इसी प्रकार के विचार आल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक ) ने भी व्यक्त किए। एटक महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि मसौदा नियमों के तहत वर्क फिक्सेशन कमेटी में टेड यूनियनों के प्रतिनिधित्व की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। वेतन की परिभाषा सही नहीं है। और भी कई खामियां हैं जिन पर हम सरकार को जल्द ही अपने विचारों से अवगत कराएंगे। श्रम मंत्रलय ने पिछले सप्ताह वेतन संहिता कानून से संबंधित नियमों का मसौदा जारी किया था और पहली दिसंबर तक इस पर लोगों से सुझाव देने को कहा था। वेतन संहिता विधेयक, इस वर्ष अगस्त में संसद से पारित हुआ था।




सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक के मसौदे को लेकर ट्रेड यूनियनों के साथ सरकार की पटरी नहीं बैठ पा रही है। यूनियनों ने सरकार की ओर से तैयार संहिता के चौथे मसौदे को भी अस्वीकार कर दिया है। इससे निकट भविष्य में सामाजिक संहिता विधेयक पेश होने की संभावनाएं धूमिल हो गई हैं। सामाजिक सुरक्षा से संबंधित वर्तमान कानूनों को समेट कर एक सामाजिक सुरक्षा संहिता कानून का रूप देने के लिए श्रम मंत्रलय ने मंगलवार को ट्रेड यूनियनों और नियोक्ताओं समेत साङोदारों की बैठक बुलाई थी। इसमें प्रधानमंत्री कार्यालय की सलाह पर तैयार संहिता के चौथे मसौदे को चर्चा के लिए पेश किया गया। लेकिन यूनियनों ने इसे अस्वीकार कर दिया।

श्रम मंत्रलय द्वारा तैयार तीन मसौदों को ट्रेड यूनियने पहले ही अस्वीकार कर चुकी हैं। जबकि तीसरे मसौदे पर पीएमओ ने भी यह कहते हुए आपत्ति जता दी थी कि इसमें सामाजिक सुरक्षा की मौजूदा तमाम स्कीमों को मिलाकर एक समग्र और एकीकृत स्कीम तैयार करने के सरकार के उद्देश्य को पूरा नहीं किया गया गया है। लिहाजा मंगलवार की बैठक में चौथे मसौदे को चर्चा के लिए पेश किया गया। इसमें भारतीय मजदूर संघ यानी बीएमएस के महासचिव विरजेश उपाध्याय ने कहा कि इस रूप में ये कानून पारित नहीं हो सकता। इसमें सरकार की ओर से ईपीएस में 1.16 फीसद योगदान के प्रावधान को भी हटा दिया गया है। बीएमएस ने कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) और कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) के साथ छेड़छाड़ पर गहरी

Source:- Jagran