केंद्र सरकार कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी पर सभी हितधारकों के साथ बैठकों दौर शुरू करने जा रही है ताकि इसे जल्द ही कानूनी अमली जामा पहनाया जा सके। सरकार ने पिछले महीने ही इससे जुड़ा ड्राफ्ट जारी कर दिया था। अब उसी ड्राफ्ट को लेकर विचार विमर्श किया जाएगा।

5 नवंबर को होने वाली बैठक में सबसे अहम मुद्दा कर्मचारी भविष्य निधि यानी ईपीएफ को नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) में ट्रांसफर करने के मुद्दे पर चर्चा के बाद मंजूरी दी जा सकती है। ऐसा करने के पीछे दलील दी जा रही है कि कर्मचारियों की रकम पर ज्यादा मुनाफा संभव हो सकेगा।








सेवानिवृत्ति के बाद ज्यादा पेंशन :

साथ ही रिटारयमेंट की उम्र सीमा के बाद पेंशन भी ज्यादा मिलने की संभावना होगी। जो कर्मचारी इसे न अपनाना चाहें उन्हें इसके लिए पूरी छूट भी दी जाएगी। पहली नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारी को इसके लिए कहीं भी आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। वो शुरुआती दौर से ही अपने लिए एनपीएस या फिर ईपीएफ में से विकल्प चुन सकता है।

वहीं मौजूदा कर्मचारी जिनका पहले से ही ईपीएफ में अंशदान जा रहा है उनके लिए ये सुविधा कागजी कार्यवाही के बाद ही संभव हो सकेगी। इसके अलावा कर्मचारियों के लिए किसी भी मेडिकल और इंश्योरेंस से जुड़ी सेवा लेने के लिए आधार कार्ड को भी अनिवार्य बनाने के लिए कानून में बदलाव करने पर चर्चा होगी। ये बदलाव ईपीएफ का फायदा लेने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा।




अस्थाई कामगारों को भी बीमा :

नए कानून में दिहाड़ी मजदूरों और अस्थाई कामगारों के लिए भी सरकार सजग दिखाई देती है। चर्चा के लिए जारी किए गए ड्राफ्ट में ऐसे लोगों के लिए इंश्योरेंस, स्वास्थ्य सेवाओं, दुर्घटना का शिकार होने की दशा में इंश्योरेंस जैसी राहत देने की सिफारिश की गई है। ड्राफ्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार समय-समय पर जरूरत के हिसाब से इस दिशा में इंश्योरेंस, मेटरनिटी लाभ, वृद्धा अवस्था पेंशन जैसी स्कीमों को लागू करती रहेगी। ड्राफ्ट में मातृत्व लाभ की भी विस्तृत व्यवस्था की गई है।




ड्राफ्ट में खामियों पर सवाल :

ड्राफ्ट में खामियों पर सवाल भले ही सरकार की 100 पन्नों के ड्राफ्ट में 150 से ज्यादा बिंदुओं पर चर्चा कर बदलाव की मंशा हो लेकिन जानकार इसे नाकाफी मान रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक ये पुरानी व्यवस्था में ही मामूली फेरबदल भर है। वहीं कर्मचारी संगठनों का भी मानना है कि ड्राफ्ट में बातें तो बहुत कही गई हैं लेकिन उन्हें पूरा कैसे किया जाएगा और किस तरह से कर्मचारी को फायदा पहुंचेगा उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है। उम्मीद है कि 5 नवंबर से शुरू होने वाली बैठकों के दौर से पहले सरकार इन मुद्दों को सुलझा लेगी।