रेलकर्मियों को इस महीने पहली बार 25 तारीख को वेतन मिल जाएगा। उत्तर और पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने बैंकों की हड़ताल के ऐलान के बीच तय समय से पहले बोनस और वेतन कर्मचारियों के खातों में भेजने का फैसला किया था।
ठगा महसूस कर रहे रेलकर्मी, ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन ने दर्ज करवाई आपत्ति
25 दिन से शुरू होकर 78 दिन तक पहुंचा बोनस








1977 में केंद्र सरकार ने 25 दिन का बोनस देने की शुरुआत की थी। उस समय कर्मचारियों की संख्या  और उसके ऊपर प्रति 2250 मिलियन शुद्ध टन किमी. रेवेन्यू ट्रैफिक आय के आधार पर बोनस दिया गया था। वर्ष 2016 तक वेतन सीमा का आधार महज 3500 रुपये था। वर्ष 2016 से 7000 रुपये वेतन को बोनस का आधार बनाकर गणना शुरू की गई थी। इसमें  जो राशि आएगी उसे कर्मचारियों की संख्या से भाग दिया जाता है। यदि प्रोडक्शन का इंडेक्स 90 से कम होगा तो उस वर्ष बोनस भुगतान नहीं करने का भी प्रावधान है । रनिंग कर्मचारियों के प्रकरण में रनिंग भत्ता वेतन में जोड़कर बोनस दिया जाता है।




बोनस में इजाफा करने और उसकी गणना की गणित बदलने के लिए ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन ने रेलवे बोर्ड से डिमांड की थी। महंगाई को देखते हुए बोनस भी सम्मानजनक मिलना चाहिए। – अजय कुमार वर्मा, मंडल मंत्री, एनई रेलवे मजदूर यूनियन




ऐसे होती है बोनस की गणना

वर्ष 2018-19 के लिए 78 दिन के बोनस की गणना इस तरह की जाती है। औसतन 35 से 65 हजार रुपये वेतन पाने वाले कर्मचारियों को बोनस देने का आधार केवल 7000 रुपये मासिक है। 7000 वेतन को 12 महीने से गुणा करके उसे 365 दिनों से भाग करके बोनस की रकम निकाली गई है। यह रकम 17,950.68 रुपये हुई। इस तरह प्रत्येक कर्मचारी को 17,951 रुपये बोनस मिलेगा।